
NW Desk: भारत और चीन के बीच सीमाओं को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है. लद्दाख में दोनों देश की सेनाएं आमने-सामने है. वहीं मंगलवार को पीएम मोदी ने सीमा पर गहराते तनाव को लेकर एक हाई लेवल मीटिंग की है.
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उधर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सबसे खराब स्थिति की कल्पना करते हुए सेना को युद्ध की तैयारियां तेज करने का मंगलवार को आदेश दिया है.
लद्दाख बॉर्डर पर इंडियन आर्मी अडिग
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तनाव बढ़ गया है. भारत ने इस इलाके में चीन के साथ गतिरोध से अब पीछे न होने का फैसला कर लिया है. भारत पूर्वी लद्दाख के तनाव वाले इलाके में दृढ़ता से ‘ड्रैगन’ की चाल को नाकाम करने में जुटा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काराकोरम दर्रा और इस क्षेत्र में तैनात चीनी सैनिकों का मुकाबला करने के लिए भारत ने सैनिकों को तैनात कर दिया है. बता दें कि बीते दिनों चीन ने यहां वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया था और भारतीय सैनिकों से झड़प की थी. वही इस मामले में भारत का स्टैंड अडिग है, इंडियन आर्मी नियंत्रण रेखा से एक कदम भी पीछे नहीं हटेगी
पीएम की हाई लेवल मीटिंग
पूर्वी लद्दाख सीमा पर भारत और चीनी सैनिकों के दरम्यान तनाव बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की, जिसमें बाह्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिये भारत की सैन्य तैयारियों को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया . सरकारी सूत्रों ने इस आशय की जानकारी दी.
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समझा जाता है कि शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने मोदी को पूर्वी लद्दाख में उभरती स्थिति की जानकारी दी. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि पूर्व निर्धारित बैठक का एजेंडा महत्वाकांक्षी सैन्य सुधार और भारत की सैन्य ताकत को मजबूत बनाने के बारे में चर्चा करना था .
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब कुछ ही घंटे पहले चारों जनरलों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पैंगोंग सो झील, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी की स्थिति के बारे में जानकारी दी, जहां पिछले करीब 20 दिनों से भारत और चीन के सैनिक आक्रामक रूख अपनाये हुए हैं .
सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री को लद्दाख की स्थिति से अवगत कराया गया. हालांकि, इस बैठक के बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी या ब्योरा नहीं आया है. सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल लद्दाख और उत्तरी सिक्किम एवं उत्तराखंड में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उभरती स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. एक अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया, ‘‘ भारत पर सैन्य दबाव बनाने की चीन की रणनीति काम नहीं करेगी . हम वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति कायम रखना चाहते हैं.’’
युद्ध की तैयारी तेज करें- शी जिनपिंग
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सबसे खराब स्थिति की कल्पना करते हुए सेना को युद्ध की तैयारियां तेज करने का मंगलवार को आदेश दिया है. देश की सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के महासचिव और करीब 20 लाख सैनिकों वाली सेना के प्रमुख 66 वर्षीय शी ने यहां चल रहे संसद सत्र के दौरान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के प्रतिनिधियों की पूर्ण बैठक में हिस्सा लेते हुए यह टिप्प्णी की.
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के मुताबिक, शी ने सेना को आदेश दिया कि वह सबसे खराब स्थिति की कल्पना करें, उसके बारे में सोचे और युद्ध के लिए अपनी तैयारियों और प्रशिक्षण को बढ़ाए, तमाम जटिल परिस्थितियों से तुरंत और प्रभावी तरीके से निपटे. साथ ही पूरी दृढ़ता के साथ राष्ट्रीय सम्प्रभुता, सुरक्षा और विकास संबंधी हितों की रक्षा करे.
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बीते दिनों से एलएसी पर बढ़ा तनाव
सूत्रों ने बताया कि भारत और चीन के बीच पिछले 20 दिनों से जारी गतिरोध के बीच भारतीय सेना ने उत्तरी सिक्किम, उत्तराखंड और अरूणाचल प्रदेश के साथ लद्दाख से जुडे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को मजबूत बनाया है, जो ऐसा संदेश देने के लिये है कि भारत, चीन के आक्रामक सैन्य रुख के दबाव में बिल्कुल नहीं आयेगा .
गौरतलब है कि लद्दाख में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब करीब 250 चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच 5 मई को झड़प हो गई और इसके बाद स्थानीय कमांडरों के बीच बैठक के बाद दोनों पक्षों में कुछ सहमति बन सकी . इस घटना में भारतीय और चीनी पक्ष के 100 सैनिक घायल हो गए थे . इस घटना पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी . 9 मई को उत्तरी सिक्किम में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी.
हाल के दिनों में लद्दाख और उत्तरी सिक्किम में भारत और चीन की सेनाओं ने अपनी उपस्थिति काफी हद तक बढ़ाई है. यह दोनों देशों की सेनाओं के बीच दो अलग-अलग तनातनी के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी तनाव बढ़ने और दोनों पक्षों के रुख में कठोरता आने का स्प्ष्ट संकेत देता है. करीब 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी दोनों देशों के बीच वर्चुअल सीमा का काम करती है.
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