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बच्चों की देखरेख के नाम पर अनुदान राशि का मनचाहा उपयोग कर रहे एनजीओ, जांच में हुआ खुलासा

विशेष दत्तक गृह, बालगृह में भारी अनियमितता, कायदे-कानून ताक पर

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Ranchi : बाल अधिकार के लिए काम करने और इसका दंभ भरनेवाली संस्थाएं राज्य में कई हैं, लेकिन ये सभी संस्थाएं ईमानदारी से काम कर रही हैं, ऐसा भी नहीं है. कई संस्थाएं बाल अधिकार के लिए काम करने के नाम पर अपने ही वारे-न्यारे कर रही हैं. राज्य में सरकार से अनुदान प्राप्त कर बालगृह, बालिकागृह एवं विशेष दत्तक गृह का संचालन करने के नाम पर नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन हो रहा है. एनजीओ सरकारी राशि का मनमाने रूप से उपयोग कर रहे हैं, जिसमें किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) का भी घोर उल्लंघन किया जा रहा है.

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जानिये कैसे हो रहा है नियमों का उल्लंघन

रांची के बालगृह से बच्चे के सौदे से सुर्खियों में आने के बाद  राज्य बालगृहों की जांच का निर्देश मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा दिया गया था. इसके उपरांत  जांच समिति गठित की गयी थी, जिसमें झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य भूपन साहू और रविंद्र कुमार गुप्ता शामिल थे. जांच समिति ने  17 जुलाई से आठ अगस्त तक 12 जिलों में सरकारी और गैर सरकारी अनुदान से संचलित बाल गृह का अवलोकन कर मुख्यमंत्री को जांच रिपोर्ट सौंपी है. रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य समाने आये हैं, जिससे जाहिर होता है कि बच्चों के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा  रहा है. इतना ही नहीं, बालगृह के नाम से अनुदान प्राप्त एनजीओ कागजों पर चल रहे हैं और जो बालगृह चलाये जा रहे हैं, वे बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं.

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पढ़िये पहली किस्त

सृजन फाउंडेशन, हीरा बाग चौक, मटवारी, हजारीबाग

संस्था विशेष दत्तक गृह का संचालन  झारखंड सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर कर रही है. यह बालगृह  0 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए है. इसकी आधारभूत संरचना किशोर न्यास अधिनियम के अनुसार नहीं है. जांच टीम ने सृजन फाउंडेशन द्वारा संचलित बालगृह को सुरक्षा की दृष्टि उपयुक्त नहीं पाया. संस्था द्वारा विशेष दत्तक गृह में कर्मचारी का चयन नियम को तक पर रखकर किया गया है. इतना ही नहीं, बालगृह में काम करनेवाले की पुलिस द्वारा जांच भी नहीं करायी गयी है. जबकि , विशेष दत्तक गृह वाले कर्मचारियों के पास कोई पूर्व का अनुभव नहीं है.

सरकार ने आधारभूत संरचना के लिए दी थी राशि, फिर भी व्यवस्था नदारद

राज्य सरकार की ओर से विशेष दत्तक गृह संचालन के लिए आधारभूत संरचना की राशि दी गयी थी, जिससे बच्चों के लिए सोने के बेट की व्यवस्था की जानी चहिए थी. लेकिन, संस्था के विशेष दत्तक गृह में इसके अलावा अन्य व्यवस्था भी नदारद थी. वहीं,  वित्तीय सहायता का उपयोगिता प्रमाणपत्र जांच दल को नहीं दिखाया गया. विशेष दत्तक गृह संस्था में मौजूद बच्चों की समय-समय पर चिकित्सकीय जांच हेतु किसी भी पारा लीगल वॉलंटियर की व्यवस्था नहीं है. जांच टीम ने सृजन फाउंडेशन द्वारा चलाये विशेष दत्तक गृह को 0 से 6 वर्ष के बच्चों को रखने के लिए उपयुक्त नहीं माना और बच्चों की सुरक्षा की दृष्टी से उचित नहीं माना.

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नियमों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा हजारीबाग का बालिका गृह

सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर विकास केंद्र द्वारा बरही रोड हजारीबाग में बालिका गृह का संचालन किया जा रहा है. इस बालिका गृह में 50 बालिकाओं को रखने का अनुदान राज्य सरकार से मिलता है. लेकिन, बालिकागृह का संचालन नियमों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा है. यहां किशोर न्याय अधिनियम (जेजे एक्ट) का घोर उल्लंघन किया जा रहा है. दरअसल, जिस पते पर बालिका गृह का संचालन किया जा रहा है, वह सरकार के पास दर्ज पते से अलग है. यानी, सरकारी दस्तावेजों में इस बालिका गृह का जो पता दर्शाया गया है, वहां इसका संचालन न करके इसे दूसरी जगह पर संचालित किया जा रहा है. जहां बालिका गृह का संचालन किया जा रहा है, वह संचालक के रिश्तेदार का घर है, जहां  बालिकाओं की सुरक्षा की कोई भी व्यवस्था नहीं की गयी है. इस बालिका गृह में बाहर के व्यक्ति एवं बालिका गृह में रहनेवाली बालिकाएं आसानी से कभी भी कहीं भी आ-जा सकते हैं. बालिका गृह के संचालन में सीसीटीवी कैमरा होना आवश्यक है, जो कि जांच के दौरान यहां पर कहीं नहीं देखा गया. बालिकाओं के रहने के दृष्टिकोण से यह बालिका गृह पूरी तरह से असुरक्षित है.

आधारभूत संरचना का अभाव, राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं है संस्था के पास

बालिकाओं को किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार कपड़े-जूते, आवश्यक सामग्री के वितरण का स्टॉक रजिस्टर रखा जाना अनिवार्य है, लेकिन संस्था के पास कोई स्टॉक रजिस्टर नहीं  है. राशि को मनमाने तरीके से खर्च किया जाता है. वहीं,  बालिका गृह में रह रहे सभी बच्चों की फाइल में चिकित्सीय जांच परामर्श कागजात होने चाहिए, लेकिन संस्था में यह भी नदारद थे. आधारभूत संरचना के लिए सरकार द्वारा राशि दी गयी है, लेकिन उसका उपयोगिता प्रमाणपत्र संस्थान के पास मौजूद नहीं है.

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बाल कल्याण समिति के सदस्य के रुकने की व्यवस्था नहीं

बालिका गृह में बाल कल्याण समिति के सदस्य के रुकने की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन यहां उनके रुकने के लिए कमरे की व्यवस्था नहीं है. इस बालिका गृह में किशोर न्याय अधिनियम का घोर उल्लंघन पाया गया. वहीं, जांच टीम ने सरकार को अनुशंसा की है कि बालिका गृह को वर्तमान एजेंसी को निरस्त कर किसी सक्षम एजेंसी को तत्काल देने की आवश्यकता है.

बच्चियों से जुड़े दस्तावेज भी हैं आधे-अधूरे

टीम ने जांच के दौरान पाया है कि इस बालिका गृह में बालिकाओं की खेल, पढ़ाई एवं अन्य किसी भी तरह की गतिविधि नहीं देखी गयी. सिर्फ दो कमरों में यह बालिका गृह संचालित होता है. बच्चों के लिए बेड की व्यवस्था नहीं की गयी है. बालिका गृह में सभी बालिकाओं की फाइल और  फोटो के अवलोकन में पाया गया कि  जो बच्चियां यहां रह रही हैं, वे गिरिडीह जिले के खास अनुमंडल की हैं. वहीं बच्चियों को रखने के आदेश पत्र में  बाल कल्याण समिति के सिर्फ अध्यक्ष के हस्ताक्षर हैं, जो नियम के अनुसार नहीं है.

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