
Ranchi: राजधानी रांची में भी लखीमपुर खीरी (यूपी) जैसा जघन्य हादसा हुआ है. रांची से सटे तिलता मौजा में जमीन माफियाओं ने जोर-जबरदस्ती के बल पर जमीन कब्जाने की कोशिश में एक आदिवासी महिला पर गाड़ी चढ़ा दी. तिलता में स्थानीय ग्रामीण वर्षों से पूजा पाठ करते आ रहे हैं. रातू थानांतर्गत इस जमीन पर पिछले कुछ दिनों से जमीन माफियाओं की लगातार नजर रही है. जमीन पर निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद जमीन पर कब्जा करने की साजिश माफिया करते आ रहे हैं.
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30 सितंबर को लगभग 60 हथियारबंद लोग जमीन पर कार्य कराने को आये. उनकी इस हरकत पर स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध जताया. इसी क्रम में जमीन बिचौलियों ने एक आदिवासी विधवा सुको उरांव पर गाड़ी चढ़ा दी. ग्रामीणों और बिचौलियों के बीच तनातनी की स्थिति और झड़प के दौरान एक आदिवासी मारा भी गया. इधर, सुको उरांव पिछले 10 दिनों से जिंदगी और मौत से जूझ रही है. भाजपा विधायक दल के नेता और पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर सवाल उठाया है. साथ ही उसे इंसाफ दिलाने को कहा है.

मदद की बजाय ग्रामीणों को फंसाने में लगी पुलिस
बाबूलाल मरांडी ने ट्विटर पर भी अपनी शिकायत रखते हुए कहा है कि सुको की हालत नाजुक है. पर उसे अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है. कोई चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध नहीं करायी गयी है. बजाय इसके उल्टे पुलिस 3 ग्रामीणों को पकड़कर ले गयी है. अपनी परंपरा और जमीन बचाने के लिए आवाज़ उठाने वाले आदिवासियों को भी न्याय मिलना चाहिये. इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिये. इसके अलावे ऐसे जमीन दलालों को चिह्नित कर जेल भेजा जाए. सरकार को सुको उरांव के बेहतर चिकित्सा की व्यवस्था करनी चाहिये. इसके अलावे अकर्मण्य ग्रामीण एसपी को तत्काल निलंबित किया जाना जरूरी है.
सुको का लिया हालचाल
घायल सुको उरांव से बाबूलाल ने रविवार को भेंट की. उसका हालचाल लिया. चिकित्सकों से उसे भरपूर मदद उपलब्ध कराने का आग्रह किया. इससे पूर्व तिलता में ग्रामीणों से भी विस्तृत जानकारी ली थी.
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