Main SliderNational

मोदी राज में बेरोजगारी का हाल: टूटा ढाई साल का रिकॉर्ड, बेरोजगारी दर बढ़कर हुई 7.2 फीसदी  

NW Desk : देश की युवा पीढ़ी नौकरी की जुगाड़ में दिन रात लगी है. इस वक्त देश में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी ही है. फरवरी के महीने में भारत में बेरोजगारी पिछले ढाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. बेरोजगारी की दर फरवरी महीने में 7.2 प्रतिशत हो गई है. भारतीय अर्थव्यवस्था निगरानी केंद्र (सीएमआईई) की ओर से बेरोजगारी दर को लेकर जो आंकड़े पेश किये गये, उसमें स्पष्ट बताया गया है कि फरवरी में देश में बेरोजगारी की दर 7.2 प्रतिशत पहुंच गई. यह आंकड़ा सितंबर 2016 के बाद के बाद से सबसे ज्यादा है और साथ ही साल 2017 के फरवरी महीने में यही आंकड़ा 5.9 प्रतिशत था.

बेरोजगारी की बढ़ी हुई दर को लेकर मुंबई स्थित सीएमआईई के प्रमुख महेश व्यास ने रॉयटर्स से बातचीत बाल श्रम की दर में गिरावट का हवाला देते हुए कहा कि, इस समय नौकरी मांगने वाले लोगों की संख्या में कमी आयी है , लेकिन इसके बावजूद भी बेरोजगारी दर में बढ़ोत्तरी हो गई है. उन्होंने बताया कि बीते साल 40.6 करोड़ लोगों के पास रोजगार था, तो इस साल नौकरी का आंकड़ा करीब 40 हो गया है.

 

इसे भी पढ़ें – पीएम मोदी कैमरे के लिए जीते हैं,  हर चीज को इवेंट बनाते हैं :  राहुल गांधी  

CMIE के आंकड़े ज्यादा भरोसेमंद हैं

सीएमआईई की ओर से जो आंकड़ा पेश किया जाता है, वह देश के हजारों-लाखों लोगों के किये गये   सर्वेक्षण पर आधारित रहती है. साथ ही कई अर्थशास्त्री ङभी CMIE के पेश किये गये बेरोजगारी के आंकड़ों को सरकार के आंकड़ों से ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं.

हालांकि मोदी सरकार की ओर से बेरोजगारी कम करने के एलानों के बीच ये आंकड़ा सरकार की सेहत के लिये अच्छी नहीं है. विपक्ष की ओर से सड़क से लेकर संसद तक बेरोजगारी और किसानों का मुद्दा मूल रूप से उठाया गया है. साथ ही आये दिन प्रदर्शन भी कई जगहों पर देखने को मिलते ही हैं. लेकिन देश में फरवरी के महीने में बेरोजगारी को लेकर जो आंकड़ा सामने आया है, वह विपक्ष के लिए इस चुनावी साल में एक बड़ा चुनावी मुद्दा है.

इसे भी पढ़ें – हरियाणा :  27 साल में आईएएस खेमका का 52वां ट्रांसफर,घोटाले उजागर करते हैं,  नेताओं को नहीं भाते

सरकार की ओर से रोका गया था बेरोजगारी के आंकड़ों को

वैसे तो इससे पहले सरकार की ओर से जब भी बेरोजगारी दर को लेकर आधिकारिक आंकड़ा जारी किया, उस दौरान उसे पुराना बताया गया. जबकि पिछले साल दिसंबर में बेरोजगारी के जारी आंकड़ों को जारी करने से सरकार की ओर से रोक दिया गया था. उस आंकड़े को लेकर अधिकारियों ने कहा था कि आंकड़ों में जांच करने की जरूरत है. वहीं बेरोजगारी के जिन आंकड़ों को सरकार की ओर से रोका गया, उसे कुछ हफ्ते पहले एक बिजनेस स्टैंडर्ड ने छाप दिया था. जारी किये गये आकड़ों में यह बताया गया था कि साल 2017-18 में भारत में बेरोजगारी की दर 45 सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है.

दूसरी ओर इस साल के जनवरी महीने में CMIE की जो रिपोर्ट आयी है , उसके मुताबिक 2016 में की गई नोटबंदी के बाद से 2018 में करीब 1.1 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई. जबकि साल 2017 में लागू की गई जीएसटी से लाखों कारोबारियों को काफी नुकसान पहुंचा. यहां गौर करने वाली बात ये है कि बीते साल मोदी सरकार की ओर से संसद में कहा गया था कि छोटे कारोबार में नोटबंदी से कितनी नौकरियां प्रभावित हुईं, इसका कोई आंकड़ा सरकार के पास मौजूद नहीं है.

इसे भी पढ़ें – फिर टला वेंडर मार्केट को बसाने का काम, अब सात मार्च को लॉटरी से होगा आवंटन

Advertisement

Related Articles

Back to top button
Close