
Akshay Kumar Jha
Ranchi: नदी, पहाड़ और खनिज वाला झारखंड. जल, जंगल जमीन वाला झारखंड. संस्कृति, परंपरा और विरासत की बात करने वाले झारखंड में कई चीजों की लूट की सरकार ने खुली छूट दे रखी है.
जिन्हें जमीन लूटना है, वो जमीन लूट रहे हैं और जिन्हें यहां की खनिज संपदा लूटनी है, वो उसकी लूट में जुटे हैं. हेमंत सरकार के वक्त से ही बालू एक बड़ा चर्चा का विषय रहा है झारखंड में.
गाहे-बगाहे बीजेपी हमेशा जेएमएम पर बालू का टेंडर मुंबई की कंपनी को देने और लूट मचाने का आरोप लगाते रहती है. इस बीच एक साल से झारखंड के 472 बालू घाटों में 447 पर सरकारी तौर-तरीके से बालू उठाव नहीं हो रहा है.
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सरकारी आंकड़ों की मानें तो झारखंड में सिर्फ 25 बालू घाटों से बालू की ढुलाई हो रही है. विभाग और सरकार का दावा है कि इन्हीं 25 बालू घाटों की सप्लाई से झारखंड भर में बालू की डिमांड पूरी की जा रही है. जबकि ऐसा कहना ठहाके लगाकर हंसने जैसी बात है.
24 जिले और सिर्फ 25 बालू घाट
झारखंड में शायद ही ऐसा कोई प्रोजेक्ट बचा हो, जो बालू की कमी की वजह से बंद पड़ा हो. आम लोगों के घर बनाने से लेकर सरकारी योजनाओं के अलावा माइंस में बालू भरने से लेकर वो तमाम काम हो रहे हैं.
लेकिन झारखंड में तो सिर्फ 25 बालू घाट से ही बालू निकाले जा रहे हैं. ऐसे में सवाल है कि बाकी का बालू आ कहां से रहा है. इसका जवाब यह है कि बालू आ रहे हैं उन्हीं बालू घाटों से जिसे सरकार ने बंद रखा है.
लेकिन इसके लिए एक मोटी रकम अदा की जा रही है, जो सीधे सरकारी अधिकारियों की जेब में जा रही है. साथ में बालू के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खजाने अवैध कमाई से भर रहे हैं.
जानें किस जिले में हैं कितने बालू घाट, कितने खुले और कितने बंद
झारखंड को सरकार ने बालू के लिए छह सर्कल में विभाजित किया है. रांची, धनबाद, दुमका, हजारीबाग, कोलहान और पलामू. सबसे ज्यादा जिले संताल के दुमका सर्कल के पास हैं.
उसके बाद रांची का नंबर आता है. आपको जान कर यह ताज्जुब होगा कि रांची जिले में एक भी बालू घाट से बालू उठाव नहीं हो रहा है. लेकिन रांची जिले में सैकड़ों प्राइवेट और सराकरी प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं.
धनबाद सर्कल में तीन जिले आते हैं. बोकारो, धनबाद और गिरिडीह. बोकारो और धनबाद में कोयला खनन का काम होता है. कोयला खनन के बाद खानों को बालू से भरने का काम होता है. इसके लिए काफी मात्रा में बालू चाहिए होता है.
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि बोकारो में एक और धनबाद में एक भी बालू घाट चालू नहीं है. तो सवाल है कि खदानों में बालू भरा कैसे जा रहा है.
साथ ही दूसरे निर्माण के काम बगैर बालू के कैसे हो रहे हैं. सीधे तौर पर बालू का अवैध कारोबार कर इसकी सप्लाई की जा रही है. जिसमें ऊपर से लेकर नीचे के तमाम अधिकारी और अवैध कारोबारी जुड़े हुए हैं.
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रांची सर्कल
| जिला | बालूघाटों की संख्या | सक्रिय बालू घाट |
| रांची | 24 | 00 |
| गुमला | 14 | 01 |
| खूंटी | 16 | 01 |
| लोहरदगा | 12 | 02 |
| सिमडेगा | 13 | 05 |
धनबाद सर्कल
| जिला | बालू घाटों की संख्या | सक्रिय बालू घाट |
| बोकारो | 40 | 01 |
| धनबाद | 19 | 00 |
| गिरिडीह | 26 | 01 |
दुमका सर्कल
| जिला | बालू घाटों की संख्या | सक्रिय बालू घाट |
| देवघर | 22 | 00 |
| दुमका | 17 | 01 |
| गोड्डा | 38 | 01 |
| जामताड़ा | 12 | 00 |
| पाकुड़ | 12 | 00 |
| साहेबगंज | 04 | 00 |
हजारीबाग सर्कल
| जिला | बालू घाटों की संख्या | सक्रिय बालू घाट |
| चतरा | 18 | 00 |
| हजारीबाग | 41 | 00 |
| कोडरमा | 25 | 01 |
| रामगढ़ | 08 | 01 |
कोल्हान सर्कल
| जिला | बालू घाटों की संख्या | सक्रिय बालू घाट |
| चाईबासा | 12 | 01 |
| जमशेदपुर | 15 | 02 |
| सारकेला-खरसांवा | 24 | 01 |
पलामू सर्कल
| जिला | बालू घाटों की संख्या | सक्रिय बालू घाट |
| लातेहार | 05 | 00 |
| पलामू | 30 | 05 |
| गढ़वा | 25 | 02 |
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