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बैंक मोड़ से लेकर पांडरपाला तक आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा

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Dhanbad: बैंक मोड़ से लेकर पांडरपाला तक सैकड़ों एकड़ जमीन आदिवासी खाता की है. सभी जमीन पर बाहरी लोगों ने कब्जा जमा लिया है. इन सभी जमीन की धड़ल्ले से खरीद-बिक्री हो रही है. इन जमीन के मूल रैयत को ढूंढ़ पाना भी अब कठिन है. ऐसी जमीन पर बड़े-बड़े मॉल,  अपार्टमेंट, रिहायशी घर, बाजार बन गये हैं पर कोई चूं तक नहीं बोल रहा. इस बाबत झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार टुडु ने कहा कि ऐसी जमीनों पर कब्जे और खरीद-बिक्री की जांच होनी चाहिए. बेशकीमती जमीन पर बाहरियों का कब्जा चिंताजनक है.

खाली जमीन पर कब्जे के लिए होता रहा है खून-खराबा

शहर के बैंक मोड़, रांगाटांड, वासेपुर, पांडरपाला आदि इलाके में स्थित सैकड़ों एकड़ जमीन को दबंगों ने करोड़ों रुपये में बेचा. दबंगों ने जमीन बेचने के नाम पर एक एग्रीमेंट कराया और मोटी रकम ली. आदिवासी खाता के इलाके में अब तक खाली जमीन पर कब्जा के लिए आये दिन खून-खराबा हो रहा है. वासेपुर-पांडरपाला में लोगों की जान जा रही है. इसके बावजूद न तो पुलिस कोई कार्रवाई कर रही है और न ही प्रशासन कुछ कर रहा है. मामले को लेकर जब न्यूज विंग ने पड़ताल की तो रजिस्ट्री आफिस से लेकर अंचल आफिस के पदाधिकारियों तक ने इस बात से सहमति जतायी कि बैंक मोड़ और आसपास के इलाके में जितने भी गैर सरकारी निर्माण हुए हैं, उनमें से ज्यादातर निर्माण आदिवासी खाता ही जमीन की जमीन पर हुए हैं. बहुत सारी जमीन रेलवे की है. हरिजनों की भी जमीन यहां रही है. इन जमीन से संबंधित कागजात की मांग करने पर कहा कि देखना होगा, खोजना होगा. दरअसल, इन इलाकों में स्थित जमीन पर दबंगों ने अंचल के कर्मियों की मिलीभगत से ही अवैध कब्जा दिलाया.

भूदा मौजा में आदिवासी खाता की जमीन पर बस गये बाहरी लोग

भूदा मौजा के 36 नंबर खाता में स्थित आदिवासी खाता की जमीन पर अवैध कब्जा लगातार जारी है. दबंग इस जमीन का एक से डेढ़ लाख रुपये प्रति कट्ठा की दर से कब्जा दिला रहे हैं. आदिवासी खाता की जमीन पर इस इलाके में बड़ी-बड़ी कालोनियां बनी हुई हैं. आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जा की बात राजनीति के लिए या कमजोर लोगों से आर्थिक दोहन के लिए ही यदा-कदा उठायी जाती है. जबकि,  आदिवासियों की जमीन पर स्थित अवैध कब्जे को हटाने की अगर गंभीर पहल हो तो बहुत सारे प्रभावशाली नेता और लोग इसके दायरे में आ जाएंगे.

जमीन पर कब्जे की जांच भी सवालों के दायरे में

ऐसा नहीं लगता कि आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ जमीन पर धनबाद में हुए अवैध कब्जे की जांच होगी. ऐसा होने पर जमीन पर कब्जा जमाये लोग वह कागजात दिखाएंगे जिसके आधार पर कब्जा किया है. ऐसे कागजात पर हस्ताक्षर करनेवाले और मामले में चुप्पी साध कर रखनेवालों का भी मतलब साफ हो जाएगा. मामले में सरकारी दस्तावेज की वास्तविकता जानने के लिए धनबाद के अंचलाधिकारी प्रकाश कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गयी. उनके फोन नंबर दो बार रिंग किया गया पर फोन रिसीव नहीं किया गया.

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