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IL&FS पर सरकार का ‘कब्जा’, नया बोर्ड गठित

सत्यम कंप्यूटर के बाद पहली बार हुआ है ऐसा.

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New Delhi : संकटग्रस्त कंपनी आइएलएंडएफएस के मैनेजमेंट पर अब सरकार का कब्जा हो गया है. ब्याज की रकम नहीं चुका पाने की वजह से लगातार यह कंपनी लगातार सुर्खियों में है. राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने आइएलएंडएफएस के निदेशक मंडल के पुनर्गठन के लिए केंद्र सरकार की अंतरिम याचिका मंजूर कर ली. कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने एनसीएलटी में इसका आवेदन दिया था.

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नये निदेशक मंडल की बैठक 8 को

सरकार IL&FS के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में छह सदस्यों को नियुक्त करेगी। नये बोर्ड में कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी उदय कोटक, आइएएस अधिकारी विनीत नय्यर, पूर्व सेबी चीफ जीएन वाजपेयी, आइसीआइसीआइ बैंक के पूर्व चेयरमैन जीसी चतुर्वेदी, आइएएस अधिकारी मालिनी शंकर और नंद किशोर शामिल होंगे. नये सदस्यों के निदेशक मंडल को पहली मीटिंग 8 अक्टूबर को करने का निर्देश दिया गया है.

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सत्यम को अपने हाथों में लेकर टेक महिंद्रा को बेचा था

बीते वर्ष 2017 में सरकार ने कर्ज तले दबी रीयल्टी कंपनी यूनिटेक लि. पर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहा तो सुप्रीम कोर्ट में सरकार को चुनौती दी गई और कोर्ट ने सरकार को ऐसा करने से रोक दिया था. हां, नौ साल पहले वर्ष 2009 में सरकार ने सत्यम कंप्यूटर्स को अपने कब्जे में जरूर ले लिया था. तब कंपनी के अंदर अकाउंटिंग स्कैम (लेखा-जोखा में घोटाला) सामने आने पर निवेशक आइटी सेक्टर में निवेश करने से घबराने लगे थे. सरकार ने उन्हीं निवेशकों की भरोसा-बहाली के लिए सत्यम कंप्यूटर के मैनेजमेंट को अपने हाथ में लेकर इसे टेक महिंद्रा के हाथों बेच दिया.

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