Dhanbad

IIT-ISM कर रहा जूठन से खाद बनाने पर शोध, दुर्गंध ने लाहबनी धैया के लोग का जीना किया मुहाल

Dhanbad: आइआइटी-आइएसएम कैंपस से सटे लाहबनी धैया का वातावरण कुछ दिनों से प्रदूषित हो गया है. हवाओं में काफी दुर्गंध है. इस क्षेत्र में लोगों का रहना मुश्किल होने लगा है.

मोहल्ले के लोग आइआइटी आइएसएम प्रबंधन को इसका जिम्मेवार बता रहे हैं. हालांकि, आइआइटी-आइएसएम जूठन से खाद बनाने के लिए रिसर्च कर रहा है.

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जूठन से खाद बनाने पर हो रहा शोध

इन दिनों आइआइटी-आइएसएम में जूठन से खाद बनाने का शोध हो रहा है. इस शोध को लेकर संस्थान प्रबंधन ने धैया लाहबनी की चाहरदीवारी के ठीक किनारे दर्जनों की संख्या में ड्राम रखे हैं.

ड्रम में छात्रों का जूठन जमा कर उसे सड़ाया जाता है, फिर उसी सड़े अनाज से विभाग खाद बनाने पर शोध कर रहा है. जूठन जब सड़ती है तो हवा में दुर्गंध फैल जाती है.

जिस कारण वहां रहनेवाले लोग कुछ दिनों से काफी परेशान हैं. इसके अलावा भी लाहबनी मोहल्ले से सटे आइआइटी की चाहरदीवारी से सटा जो नाला बना है, उसमें भी गंदा पानी बहाया जाता है. नाला भी जाम है.

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नाला से निकलनेवाले दुर्गंध से भी लोग काफी परेशान हैं. लिहाजा लाहबनी के लोग आइएसएम प्रबंधन के खिलाफ जन प्रतिनिधियों व उपायुक्त से शिकायत करने की तैयारी में हैं.

खुले में मोहल्ले के बीच ऐसा शोध खतरनाक: स्थानीय

धैया लाहबनी निवासी प्रभात कुमार का कहना है कि आइएसएम प्रबंधन को खाद बनाने का शोध बंद स्थान पर करना चाहिए. खुले में मोहल्ले के बीच ऐसा शोध खतरनाक हो सकता है.

इससे संक्रामक बीमारियां मोहल्ले में फैल सकती है. जूठन सड़ाने के लिए खुले में ड्रम रखकर कौन सा शोध हो रहा है. वहीं निलेश सिंह कहते हैं कि आइएसएम आइआइटी प्रबंधक को समझना चाहिए कि प्रदू्षित हवा से बीमारी केवल स्थानीय लोगों को ही नहीं, बल्कि उन छात्रों को भी हो सकती है जो वहां रहकर पढ़ाई करते हैं.

गोद लेने की बात थी और जीना मुहाल कर दिया

स्थानीय निवासी मोहन कुमार समेत अन्य लोगों नें कहा है कि आइएसएम आइआइटी से सटे मोहल्ले में जहां विकास होना चाहिए, वहीं के लोग विभिन्न समस्या से जूझ रहे हैं.

महत्वपूर्ण बात है कि आइएसएम ने इस मोहल्ले को गोद लेने की बात कही थी और अब हाल यह है कि यहां के लोगों को खुले वातावरण में सांस लेना मुश्किल हो रहा है.

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