
- मीडिएशन सेंटर में निपटाए जा रहे हैं पुराने से पुराने विवादित मामले
Ranchi : रांची के दो व्यवसायियों के बीच वर्ष 2011 में व्यापारिक इकरारनामा हुआ था. करीब छह करोड़ रूपये का इकरारनामा था. शर्तों के मुताबिक बात आग नहीं बढ़ी. दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया.
मामला अदालत तक जा पहुंचा. फिर शुरू हो गया कोर्ट-कचहरी का चक्कर. दोनों व्यवसायी परेशान. इस मामले को कोर्ट की ओर से मीडिएशन सेंटर भेजा गया. जहां मीडिएटर ने नौ साल पुराने इस मामले को एक दिसंबर को सुलझा दिया.
न्याय दिलाने में मीडिएशन सेंटर महती भूमिका निभा रहा है. याद होगा झारखंड के पूर्व डीजीपी डीके पांडे व उनकी बहू रेखा मिश्रा का मामला.
पांडे की बहू रेखा मिश्रा ने अपने पति एस पांडे, ससुर डीके पांडे और सास पूनम पांडे के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. दहेज प्रताड़ना, मारपीट समेत कई आरोप लगाए गए थे. मामला मीडिएशन सेंटर में निपट गया और दोनों पक्ष कोर्ट कचहरी लंबे चक्कर से बच गए.
ये दो मामले महज बानगी है, एसे कितने मामले मीडिएशन सेंटर में निपट रहे हैं. इन दिनों मीडिएशन सेंटर में विशेष मध्यस्थता अभियान भी चल रहा है. यह अभियान झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार के के कार्यपालक अध्यक्ष एचसी मिश्रा ने निर्देश पर चल रहा है. अभियान के पहले दिन 39 में से 19 मामलों को बातचीत के माध्यम से सुलझा लिया गया.
इस तरह 50 फीसदी मामले मध्यस्थता के जरिये सुलझाये गये. शेष मामलों में भी विवाद से जुड़े पक्षों को अगले दौर की वार्ता के लिए समय दिया गया है. इससे जाहिर में विवादों को सुलझाने के लिए मीडिएशन बेहतर जरिया है.
इसे भी पढ़ें : कृषि बिल के विरोध में सड़क में दिखे विधायक और मंत्री, कुछ ने ट्वीट के जरिये ही किया समर्थन
कैसे होता है मीडिएशन
रांची के सिविल कोर्ट (दूसरी जिला आदालतों में भी ऐसे सेंटर है) परिसर में एक मीडिएशन सेंटर हैं. इस सेंटर में अदालतों से भेजे गए वैसे मामलों को जिन्हें बातचीत के जरिये सुलझाया जा सकता है, उन्हें भेजा जाता है. इस सेंटर में विशेषज्ञ मीडियेटर (मध्यस्थ) होते हैं. इनमें अधिवक्ता भी होतें हैं और दूसरे लोग भी.
इसके साथ संबंधित पक्षों के अधिवक्ता भी होते हैं. यहां दोनों ही पक्षों को एक दूसरे से वार्ता कर उस बिंदु पर पहुंचने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जहां वे अपने विवाद को खत्म करने पर राजी हो सके या फिर इसे सबसे न्यूनतम स्तर पर ले जा सके. कई दौर की बैठकों में दोनों पक्ष मिलकर ही विवाद को समाप्त करने का रास्ता ढूंढते हैं.
मीडिएटर अपनी मर्जी नहीं थोपता है और न ही किसी का पक्ष लेता है उसका काम ऐसा माहौल बनाना होता है जहां पर दोनों पक्ष विवाद को खत्म करने की दिशा मे आगे बढ़े. जब दोनों पक्ष राजी हो जाते हैं तो फिर समझौते के बिंदुओं के आधार पर समझौता पत्र बनवाया जाता है. इसे कानूनी मान्यता मिलती है.
इसे भी पढ़ें : स्मार्ट विलेज स्कीम की चाल सुस्त, CM Smart Village बुंडू के लिये 25 लाख का DPR बनाने में ही लगा दिये दो साल
पारिवारिक से लेकर कंपनी के मामलों में हो रही है मध्यस्थता
आजकल मीडिएशन के जरिये विवादों को सुलझाने की यह पहल काफी लोकप्रिय हो रही है. मीडिएशन की वजह से कई तलाक के मामले खत्म हुए और दंपत्ति एक साथ रहने पर राजी हो गए.
घरेलू विवाद के सालों से लंबित मामले सुलझाए गए. बड़ी कंपनियां भी अपने मामलों को सुलझाने के लिए मीडिएशन का सहारा ले रही हैं.
बड़ा फायदा
इससे सबसे बड़ा फायदा यह है कि सालों साल कोर्ट के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होती. लंबी अदालती कार्रवाई से मुक्ति मिलती है. कोर्ट और अधिवक्ताओं को फीस से मुक्ति मिलती है.
दूसरा फायदा यह है कि विवादों को सुलझाने के लिए दोनों पक्ष बैठते हैं और अपस में समझौते की शर्त तय करते हैं. एक और फायदा यह है कि अदालतों को भी इसके जरिये मुकदमों की संख्या कम करने में मदद मिलती है.
इसे भी पढ़ें : पलामू: बारात से लौट रही बस की छत पर सामान देखने चढ़े युवक को लगा करंट, मौत




