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मैं शेर की मांद में जाना चाहता था, आरएसएस मुख्यालय जाने पर प्रणब मुखर्जी का खुलासा

 भारत रत्न मिलने की खबर नहीं बताने पर शर्मिष्ठा मुखर्जी पिता प्रणब मुखर्जी से नाराज हो गयीं थीं

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NewDelhi : पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी ने एक किताब के लिए दिये इंटरव्यू में  खुलासा किया कि उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी भारत रत्न मिलने से जुड़ी खबर नहीं बताने के लिए उनसे काफी नाराज थी. बता दें कि एनडीटीवी की सोनिया सिंह ने अपनी किताब Defining India: Through Their Eyes  के लिए इंटरव्यू में पूर्व राष्ट्रपति ने मोदी सरकार की तरफ से भारत रत्न दिये जाने से लेकर आरएसएस मुख्यालय से निमंत्रण और आपातकाल जैसे विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.

भारत रत्न मिलने के बारे में बातचीत के क्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोनिया सिंह को बताया कि प्रधानमंत्री ने उनकी सहमति जानने के लिए 25 जनवरी को शाम 6 बजे फोन किया था. प्रणब मुखर्जी ने कहा, सामान्य रूप से प्रधानमंत्री मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिलते और मेरी रजामंदी लेते लेकिन वह गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति की यात्रा के कारण व्यस्त थे.

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मेरी बेटी शर्मिष्ठा  मुझ पर काफी गुस्सा हो गयी

प्रधानमंत्री चाहते थे कि भारत रत्न की घोषणा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ही हो और राष्ट्रपति को अधिसूचना जारी करने की सलाह से पहले उन्हें मेरी सहमति की जरूरत थी. राष्ट्रपति भवन की तरफ से घोषणा से पहले इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं देने की घटना को याद करके हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा,  पीएम मोदी ने मुझसे कहा कि राष्ट्रपति आपकी सहमति को लेकर मेरे फोन की प्रतीक्षा कर रहे है. पूर्व राष्ट्रपति ने हंसते हुए बताया,  मेरी बेटी शर्मिष्ठा जो मेरे साथ रहती थी,  वह मुझपर काफी गुस्सा हो गयी.

उसने कहा, आपको भारत रत्न दिया जा रहा है और आप ऐसे रिएक्ट कर रहे हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो. आपने यहां तक कि मुझे भी नहीं बताया. उन्होंने बताया, इस पर मैंने कहा कि मैं औपचारिक अधिसूचना का इंतजार कर रहा था. उसने गुस्से में कहा, अधिसूचना क्या होती है, आपको इंतजार करने की क्या जरूरत थी, निश्चित रूप से जब प्रधानमंत्री ने फोन किया था तो इसमें कोई शक ही नहीं रह जाता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय जाने के बारे में पूछने पर प्रणब ने मुस्कुराते हुए कहा, मैं शेर की मांद में जाना चाहता था और उन्हें दिखाना चाहता था कि वे गलत कर रहे हैं.

बता दें कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 6 जून 2018 को नागपुर में संघ मुख्यालय की बैठक को संबोधिक किया था.  प्रणब मुखर्जी ने संघ के कार्यक्रम में कहा था, सहिष्णुता हमारी मज़बूती है. हमने बहुलतावाद को स्वीकार किया है और उसका आदर करते हैं. हम अपनी विविधता का उत्सव मनाते हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि हम सहमत हो सकते हैं, असहमत हो सकते हैं, लेकिन हम वैचारिक विविधता को दबा नहीं सकते.

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