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कैसे होगी गांवों में पानी की किल्लत दूर: एक लाख कुंआ निर्माण का है लक्ष्य, बना सिर्फ 55

बिरसा सिंचाई कूप संवर्द्धन मिशन योजना की स्थिति काफी खराब

Nikhil kumar

Ranchi: प्रखंड क्षेत्र में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए मनरेगा से शुरू की गयी बिरसा सिंचाई कूप संवर्द्धन मिशन योजना की स्थिति काफी खराब है. इस योजना अंतर्गत 15 नवंबर 2024 (राज्य स्थापना दिवस)  तक एक लाख कूप निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अभी तक सिर्फ 55 कुंंओं का निर्माण ही कराया जा सका है. वहीं, 90706 कूपों का निर्माण कार्य चल रहा है. वहीं, करीब 9 हजार से अधिक कूप निर्माण का कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है.

ग्रामीण विकास सचिव के. श्रीनिवासन ने कूप निर्माण कार्य की स्थिति की जानकारी ली है और धीमी प्रगति पर नाराजगी भी जाहिर की है. सचिव ने सभी जिलों को इसके कारणों की समीक्षा करने को कहा है ताकि लक्ष्य के अनुसार का काम प्रारंभ किया जा सके. बता दें कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के समाप्ति 31 मार्च तक 55 कुंआ का ही निर्माण हो पाया है, ऐसे में लक्ष्य से काफी पीछे योजना चल रही है. ऐसे में सात-आठ माह में लक्ष्य को पूरा कराना मुश्किल लग रहा है.

खेतों में कुंआ निर्माण के लिए एक लाख दिए जा रहे

बिरसा सिंचाई कूप योजना से एक लाख कुंआ निर्माण कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन के लिए 500 करोड़ का प्रावधान किया गया है. खास बात यह है कि इस योजना के तहत ग्रामीण मजदूरों को मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार भी दिया जायेगा.

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24  और 2024-25 में दो चरणो में 50-50 हजार कुंओं के निर्माण का लक्ष्य तय किया है, जिसके तहत बोल्डर सिंचाइ कूप निर्माण के लिए 50 हजार रुपये एवं ईट सामग्री से कूप निर्माण के लिए एक लाख रुपये प्रति कूप निर्माण के लिये दिया जाना है. पहले चरण में 250 करोड़ व दूसरे चरण में 250 करोड़ खर्च किए जाने हैं. सरकार का मानना है कि इन कूपो से बिरसा हरित ग्राम योजना अंतर्गत पौधों की सिंचाई में यह योजना सहायक सिद्ध होने के साथ ही एक फसली खेती को दो फसली खेती करने में सहायक होगी.

इन्हें मिलना है लाभ

झारखंड सरकार ने बिरसा सिंचाई कूप संवर्द्धन योजना के तहत मनरेगा अधिनियम 2005 के अंतर्गत कृषि कार्य से संबंधित लाभार्थी, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर योजना के लाभुक, बिरसा हरित ग्राम योजना के लाभार्थी को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है. इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले अल्य कुटूम्ब भूमि सुधारों के लाभुक और शारीरिक रूप से विकलांग को इस योजना का लाभ दिया जायेगा.

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