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गड़बड़झाला ! आखिर बंद प्रेस में कैसे हो रही किताबों की छपाई

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Ranchi : राज्य में किताबों को बंद प्रेस में छापने का मामला उजागर हुआ है. जहां सरकारी स्कूल के बच्चों को नि:शुल्क दिए जाने वाली किताबों की छपाई होनी थी वह प्रेस तो बंद पाया गया. साथ ही उस स्थान पर किसी भी क्लास की किताबों की छपाई नहीं हो रही थी. जबकि जिस प्रेस को टेंडर मिला था उसने कहा था कि प्रेस में क्लास तीन, सात व आठ की कितोबों की छपाई दिए गए पते पर की जा रही है. लेकिन जांच की टीम जब वहां पहुंची तो पाया कि प्रेस के गोदाम में प्लास्टिक के पैक विषयवार किताब का बंडल पाया गया. जिससे की यह साबित होता है कि किताबों की छपाई कहीं और की गयी लेकिन इसकी पैकिंग, फिनिंसिंग का काम प्रेस के बंद गोदाम में किया जा रहा था.

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किताबों के छपाई को लेकर की गयी जांच

गौरतलब है कि किताब की छपाई का टेंडर प्रकाशकों को दिया गया था. साथ ही किताबों की छपाई दिए गए निर्देश के अनुसार हो रहा है या नहीं इसका सबूत भी देना था. इसी को लेकर विभाग के उप निदेशक मिथलेश कुमार सिन्हा को विभागीय सचिव ने मेसर्स बुर्दा ड्रक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ग्रेटर नोएडा की जांच के लिए भेजा. जब जांच की गयी तो प्रेस का पता जो दिया गया था वो सही पाया गया लेकिन वहां किताबों की छापाई नहीं पायी गयी. इस संबंध में जब मेसर्स बुर्दा ड्रक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से पूछा गया तो उसके चीफ मार्केटिंग ऑफिसर ने बताया कि क्लास तीन, सात और आठ की किताबों की छपाई दिए गए पता पर की जा रही है. लेकिन जांच रिपोर्ट में इस बात की सत्यता साबित नहीं की गयी. क्योंकि वहां तो किताबों की छपाई का काम ही नहीं चल रहा था जब्कि फिनिसिंग का काम चल रहा था.

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क्या पाया गया जांच में

वहीं जांच के बाद यह भी पता चला की प्रकाशक की ओर से क्लास सात के लिए मात्र 45 प्रतिशत किताबों की आपूर्ति की गयी है. जबकि क्लास आठ के लिए किताबों की आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू भी नहीं की गयी है. ऐसे में सरकारी स्कूल के बच्चों को समय पर किताब मिलना संभव नहीं है. सात ही जांच में यह भी पाया गया कि समय पर किताबों की आपूर्ति हो पाएगी इसके लिए भी किसी तरह की कोई पहल नहीं देखी गयी. क्योंकि प्रेस में सिर्फ तीन से चार लोग ही फिनिसिंग का काम कर रहे थे. वहीं 10 से 12 लोग किताबों की पैकिंग का काम कर रहे थे.

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