
Ranchi: प्रदेश भाजपा के लिए रांची ‘हॉट सीट’ है. इस पर पार्टी के कई हेवीवेट नेता ताल ठोंक रहे हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार सात लोकसभा सीटों पर नये चेहरे को उतारने की तैयारी में है, जिसमें रांची लोकसभा सीट भी शामिल हैं. वर्तमान सांसद रामटहल चौधरी का टिकट कटने की आशंका के बाद कई हेवीवेट उम्मीदवार सामने आ गये हैं. टिकट के लिए संघ और संगठन तक की दौड़ भी लगा रहे हैं. पार्टी के स्तर पर भी रांची लोकसभा सीट की स्क्रीनिंग की गयी है. जातिगत आधार पर किये गये विश्लेषण में कुर्मी जाति को दरकिनार कर किसी और को टिकट देने पर पार्टी सहम रही है. साथ ही महागठबंधन का भय भी सता रहा है. पार्टी रांची सीट पर दूसरी पार्टी के संभावित उम्मीदवारों पर भी नजर रखे हुए हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक आजसू का रांची लोकसभा सीट पर क्या स्टैंड होता है, इसे भी बारिकी से देखा जा रहा है. रांची लोकसभा सीट पर भाजपा 1991, 1996, 1998, 1999, 2014 जीत दर्ज कर चुकी है.
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रांची सीट पर भाजपा के कौन-कौन कर रहे दवेदारी
राम टहल चौधारी: सांसद को भी अंदेशा हो गया है कि उनका टिकट कटेगा तो ऐसे में वह अपने बेटे को अपना उतराधिकारी बनाने की इच्छा रखते हैं. बेटे को लोकसभा में टिकट मिलने की संभावना नगण्य दिख रही है. ऐसे में बेटे को विधानसभा का टिकट पक्का करना चाहते हैं. लेकिन, मुश्किल इनके सामने यह भी है कि सुदेश महतो से इनकी दूरी बढ़ गयी है. ऐसे में पार्टी का वफादार बने रहने में ही अपनी भलाई देख रहे हैं.
प्रदीप वर्मा: पार्टी द्वारा राज्य की लोक सभा सीटों के लिए उम्मीदवारों की जो स्क्रीनिंग की जा रही है उसमें सबसे आगे (प्रदेश उपाध्यक्ष) प्रदीप वर्मा का भी नाम है. वर्मा 2010 से 11 तक संघ से जुड़े रहे हैं. पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मक मानववाद के विचारों के अच्छे ज्ञाता भी हैं. संघ से जुड़े होने के कारण कई विश्वविद्यालयों में ये दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को पर भी व्याख्यान देते रहे हैं. इनकी पहली प्राथमिकता चतरा लोकसभा सीट है, अगर चतरा के वर्तमान सांसद अपनी सीट बदलते हैं. तो उनकी प्राथमिकता चतरा सीट है. नहीं तो वह रांची सीट से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में प्रबल दवेदार हैं. संघ से जुड़े होने के कारण दूसरे दावेदार से यह आगे चल रहे हैं.
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आदित्य प्रसाद साहू: रांची सीट पर भाजपा उम्मीदवार के रूप में आदित्य प्रसाद साहू का भी नाम स्क्रीनिंग किया गया है. वर्तमान में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष भी हैं. मुख्यमंत्री रघुवर दास के करीबी माने जाते हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच में ईमानदार और मिलनसार छवि के कारण इनकी उम्मीदवारी पर विचार किया जा रहा है.
मनोज महतो वाजपेयी: युवा चेहरों के रूप में पार्टी रांची ग्रामीण जिला उपाध्यक्ष के नाम पर भी विचार किया गया है. इनके प्रभाव क्षेत्र के रूप में खलारी, बुंडू, तमाड़ इलाका माना जाता है. ग्रामीण इलाके में इनकी पकड़ का भी पार्टी के द्वारा आकलन किया गया है.
अमर चौधरी: रांची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं 2014 के लोकसभा चुनाव के समय में पार्टी के उम्मीदवार के रूप में इनकी स्क्रीनिंग हुई था. रामटहल चौधरी को टिकट मिलने के कारण इन्हे वेटिंग में रखा गया. 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने रांची सीट पर इनके नाम की भी स्क्रीनिंग की है.
पार्टी के पास रांची लोकसभा सीट के लिए उम्मीदवारी के लिए पूर्व राज्यसभा सांसद अजय मारू, अमिताभ चौधरी, संजय सेठ, दीपक प्रकाश के नाम शामिल थे. लेकिन अब टिकट की दावेदारी में इनके नाम पीछे छूट गये हैं.




