
Ranchi : रांची के रातू में कोरोना काल में मरीजों के इलाज को लेकर निजी अस्पतालों की मनमानी चरम पर पहुंच चुकी है. परिजनों से मोटी रकम ऐंठने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं. लेकिन, कार्रवाई के अभाव में प्रबंधन के हौसले काफी बुलंद हैं. ऐसा ही एक मामला वरदान हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर आनंदमयी नगर रातू में सामने आया है. खलारी बाजार टांड़ स्थित रामनगर के कोविड मरीज नरेश प्रसाद गुप्ता (61वर्ष) के परिजनों को 48 घंटे के लिए 1.28 लाख का बिल थमा दिया गया. इसके बाद ही उसे रेफर करने की बात कही गयी. इसे लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट किया गया तो उन्होंने तत्काल संज्ञान में लेते हुए जिले के डीसी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया. पर जब तक उपायुक्त छवि रंजन यहां पहुंचते, नरेश प्रसाद के पुत्र सुरेंद्र गुप्ता ने प्रबंधन को हंगामे के विरुद्ध माफीनामा देकर अस्पताल से मरीज को लेकर निकल गये.
इससे पूर्व डॉ केपी सिंह और डॉ नमिता सिंह ने बिल कम करने की फरियाद लेकर आये रातू पूर्वी पंचायत की मुखिया सुषमा तिर्की के पति सुबोध प्रसाद को रंगदारी केस में फंसा दिये जाने की धमकी दी. हालांकि, मरीज को एम्बुलेंस में लाद कर बाहर सड़क पर आकर देखा तो उनकी मृत्यु हो चुकी थी. जानकारी के अनुसार नरेश प्रसाद को सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत पर उन्हें 25 अप्रैल की शाम छह बजे वरदान अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उस समय अग्रिम राशि 50 हजार रुपया जमा किया गया था. मंगलवार को सुबह दस बजे अस्पताल प्रबंधन ने परिजन को बताया कि मरीज की हालत खराब है. उसे रेफर करना होगा. उन्हें 1.28 लाख रुपये का बिल दिया गया. शेष राशि 78 हजार रुपया जमा कर मरीज को ले जाने को कहा. मरीज के भर्ती कराये 48 घंटा भी नहीं हुआ था तो बिल इतना का कैसे हुआ. इसकी शिकायत कर अपने परिजन को सूचित किया. परिजन व पंचायत के मुखिया पति सुबोध साहू सहित अन्य लोगों ने ज्यादा बिल संबंधी जानकारी लेकर मुख्यमंत्री को ट्वीट कर दिया.
इसी बीच परिजन अपराह्न 2 बजे बिल की राशि में कमी करा कर शेष राशि 60 हजार जमा करा कर मरीज को ले जाने लगे तो प्रबंधन ने अपने लेटरहेड पर माफीनामा पर हस्ताक्षर कर मरीज को ले जाने का दबाव बनाया. जिसमें ईलाज व खर्च से संतुष्ट होकर मरीज को ले जाने व आये परिजन को असमाजिक तत्व बता कर माफीनामा पर हस्ताक्षर करने को कहा. जिस पर हस्ताक्षर नहीं करने से प्रबंधन ने मरीज को नहीं छोड़ा. मरीज की हालत को देखते हुए पुत्र सुरेंद्र गुप्ता ने प्रबंधन के लिखे माफीनामा पर हस्ताक्षर कर दिया. इस बीच एम्बुलेंस हॉस्पिटल के दरवाजे पर खड़ा रहा. इसके बाद शाम करीब 4.30 बजे मरीज को आनन-फानन में एम्बुलेंस में चढ़ा दिया. परिजन जब सड़क पर आये तो देखा कि उनकी मौत हो चुकी है.
इस संबंध में सुरेंद्र गुप्ता ने वीडियो जारी कर हॉस्पिटल के प्रबंधन व डॉक्टर पर आरोप लगा कर कहा कि पैसे के लिए मरीज को अपने कब्जे में रखा तथा मृत मरीज को सौंपा है. इस संबंध में हॉस्पिटल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गयी, लेकिन संपर्क नहीं हो सका है.




