
Ranchi : राज्य के विश्वविद्यालयों में रीडर के दो वेतनमान से संबंधित मामले में नया मोड़ आया है. प्रशांत कुमार मिश्रा एवं अन्य की ओर से फिर से झारखंड हाइकोर्ट में नयी याचिका दायर कर उन्हें विश्वविद्यालय द्वारा दिये गये बकाया राशि की वसूली के आदेश को चुनौती दी गयी है. जिस पर सुनवाई करते हुए सोमवार को हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की कोर्ट ने विश्वविद्यालयों द्वारा दिये गये वसूली के आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने वसूली के आदेश पर आश्चर्य जताया. बता दें कि पूर्व में विश्वविद्यालय तथा राज्य सरकार इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट गयी थी. जहां प्रार्थी के पक्ष में फैसला आया था और राज्य सरकार हार गयी थी. प्रशांत कुमार और अन्य की याचिका पर पूर्व में हाइकोर्ट ने कहा था कि एक ही पद के लिए राज्य सरकार दो तरह के वेतनमान नहीं दे सकती.
अप्रैल 1989 के बाद प्रोन्नति पाकर बने रीडर को भी ऊंचा वेतनमान देने का आदेश दिया था.जिसके बाद प्रशांत कुमार और अन्य को बकाया राशि का भुगतान किया गया था.
इसे भी पढ़ें:पीवी सिंधु ने किया धमाल, कनाडा की मिशेल ली को हरा कर जीता सोना
यहां यह भी बता दें कि राज्य के विश्वविद्यालयों में रीडर का दो वेतनमान राज्य सरकार की ओर से दिया जा रहा था. जबकि यूजीसी ने रीडर पद के लिए एक ही वेतनमान निर्धारित किया है.
इसे लेकर प्रशांत कुमार मिश्रा एवं अन्य की ओर से हाइकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. जिस पर कोर्ट ने आदेश दिया था कि रीडर का एक ही वेतनमान होगा. जिसका मूल वेतनमान 3700- 5700 होगा. हालांकि बाद में रिपलेसमेंट पे स्केल 12000- 18300 हो गया. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सौरभ अरुण ने पैरवी की.
इसे भी पढ़ें:मिशन 2024 के गेम प्लान पर शुरू हुआ काम : भाजपा के बाद झामुमो का जनजातीय महोत्सव पहला स्ट्रोक




