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हाईकोर्ट ने रांची सदर हॉस्पिटल का पूछा स्टेटस, विजेता ने बताया ऑक्सीजन टैंकर पहुंच गया, जल्द चालू होगा प्लांट

पिछले माह हाईकोर्ट से विजेता कंस्ट्रक्शन को पड़ी थी फटकार

Ranchi: रांची सदर हॉस्पिटल में निर्माण कार्य को लेकर हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. विजेता कंस्ट्रक्शन ने अपना पक्ष रखा. विजेता की ओर से बताया गया कि हॉस्पिटल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने को लेकर टैंकर समेत फैब्रिकेटेड आइटम हॉस्पिटल में पहुंच चुका है. जल्द ही इंस्टालेशन का काम पूरा हो जाएगा.

वहीं काम कर रही पुष्पा कंपनी ने बकाया के भुगतान को लेकर गुहार लगाई थी. इस पर विजेता की ओर से कहा गया कि 3 करोड़ 80 लाख बकाया था. जिसमें 3 करोड़ 40 लाख दिया जा चुका है और अगले मंगलवार तक 40 लाख का भुगतान कर दिया जाएगा. जिससे कि पुष्पा कंपनी बैंक गारंटी देगी और कॉन्ट्रैक्टर अपना काम तेजी से करेगा. बताते चलें कि कोरोना की सेकंड वेव में हाईकोर्ट ने सदर हॉस्पिटल को पूरी तरह से चालू नहीं किए जाने को लेकर फटकार लगाई थी. वहीं कॉन्टेम्पट ऑफ कोर्ट के बाद कारवाई भी करने की तैयारी है.

सदर हॉस्पिटल का काम 2011 में शुरू हुआ था. 2014 में बिल्डिंग पूरी तरह से तैयार हो गई. इसके बाद भी सदर हॉस्पिटल के संचालन को लेकर सरकार गंभीर नहीं थी. ऐसे में हॉस्पिटल के संचालन के लिए प्राइवेट हॉस्पिटलों को आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने भी अपने हाथ वापस खींच लिए. इस बीच समाजसेवी ज्योति शर्मा ने पीआईएल दाखिल किया.

पीआईएल दाखिल किए जाने के बाद अगस्त 2017 में हेल्थ डिपार्टमेंट के प्रयास 200 बेड के साथ सदर हॉस्पिटल को चालू किया गया था. हॉस्पिटल को पूरी तरह से चालू करने के लिए दी गई 2 डेडलाइन भी फेल हो गई. हाईकोर्ट में कंटेंट ऑफ कोर्ट किया गया तो हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से 30 जून 2021 की डेडलाइन दी गई है. जिसके बाद हेल्थ डिपार्टमेंट सदर हॉस्पिटल को चालू कराने में रेस हो गया है.

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हाइकोर्ट की फटकार के बाद विजेता कंस्ट्रक्शन ने एक महीने के अंदर काम पूरा करने की कही थी बात

पिछले महीने सदर अस्पताल के मामले की सुनवाई करने के दौरान हाई कोर्ट ने विजेता कंस्ट्रक्शन को जबरदस्त फटकार लगाई थी. निर्माण का कार्य पूरा नहीं होने पर विजेता कंस्ट्रक्शन को कसूरवार ठहराया था. अदालत ने कहा था कि विजेता कंस्ट्रक्शन ने सब कॉन्ट्रैक्टर की पैसा को रोक रखा है. जिसकी वजह से कार्य पूरा होने में देर हो रही है. कंपनी ने जिन सब कॉन्ट्रैक्टर को चेक दिया वह भी बाउंस हो रहा है इसलिए कंपनी को अपना रवैया सुधारने की जरूरत है. विजेता कंस्ट्रक्शन ने अदालत को कहा था कि एक महीने के अंदर नए भवन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा.

ऑक्सीजन सिलेंडर का कोई माई- बाप नहीं

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने जिस प्रकार से तांडव मची थी उससे हर कोई डरा हुआ था. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सबसे ज्यादा ऑक्सीजन और ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ी थी. ऑक्सिजन और ऑक्सिजन सिलिंडर को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी. हाइकोर्ट ने कहा था कि अधिक से अधिक मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन का प्रबंध किया जाए.

सदर अस्पताल में लगभग 17 नए ऑक्सीजन सिलेंडर फेके पड़े हैं जिसकी देखभाल करने वाला कोई माई बाप नहीं है. आपको बता दें कि इस बरसात के मौसम में ऑक्सीजन सिलेंडर में खराबी आ सकती है. संवादाता जब सदर अस्पताल में आए प्रोजेक्ट मैनेजर से बात करने की कोशिश की तो मैनेजर बात करने को भी मुनासिब नहीं समझा और यह कह कर टाल दिया कि कल बात करेंगे.

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