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प्राइवेट सेक्टर के डॉक्टर्स की सेवा सरकारी अस्पतालों में लेने की तैयारी में हेल्थ डिपार्टमेंट, भड़का IMA

Ranchi: राज्य सरकार ने एक बार फिर प्राइवेट सेक्टर के डॉक्टर्स की सेवा सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में लेने का प्लान किया है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, झारखंड की ओर से विज्ञापन जारी कर 30 अगस्त तक आवेदन भी मंगाए गये हैं. इसमें कहा गया है कि विभागीय संकल्प (सं सं-108 (21), 14-8-24) के आधार पर राज्य के मेडिकल कॉलेज, सदर, अनुमंडलीय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में निजी क्षेत्र के डॉक्टर्स, स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स और निश्चेतक (एनेस्थिसिया) की सेवाएं मासिक, दैनिक परिलब्धि के आधार पर ली जानी है.

इसके लिए इच्छुक डॉक्टर्स संबंधित जिले के मेडिकल कॉलेज कार्यालय, सिविल सर्जन ऑफिस में इस महीने के आखिर (30 अगस्त) तक आवेदन कर सकते हैं. चयनितों को 200 रुपए प्रति मरीज से लेकर 1,50,000 रुपए प्रतिमाह तक मिलेंगे. इधर, सरकार की इस पहल को आइएमए, झारखंड और डॉक्टर्स एसोसिएशन ने आइवॉश बताया है. ऐसी पहल को अव्यवहारिक और ब्यूरोक्रेट्स का दिमागी दिवालियापन भी बताया है.

क्या कहता है आइएमए

आइएमए, झारखंड (Indian medical association) के महासचिव डॉ प्रदीप सिंह सरकार के इस प्रयास से सहमत नहीं हैं. कहते हैं कि निजी क्षेत्र के भी डॉक्टर्स को बुलाने का मतलब सरकार के पास अपने डॉक्टर्स की कमी है. आखिर सरकार क्यों नहीं जेपीएससी के जरिए डॉक्टर्स की नियुक्ति क्यों नहीं करा रही. आकर्षक सुविधाओं, सुरक्षा की गारंटी (मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट) की व्यवस्था के साथ वॉक इन इंटरव्यू करा ले. निजी क्षेत्र के डॉक्टर्स तो सरकार द्वारा ऑफर किए जा रहे पैसों से ज्यादा कमा ही रहे. सरकार के साथ जुड़ भी जाएंगे तो पूरी तरह से समर्पित रहेंगे भी नहीं. अपनी पसंद के हिसाब से काम और छुट्टी लेते रहेंगे. समय पर अपने डॉक्टरों को प्रोमोशन, उचित प्रोटेक्शन, आकर्षक वेतन और नियमित नियुक्ति के लिए सरकार पहल करे तो सकारात्मक परिणाम दिखेंगे. ऐसे प्रयोगों से ना समाज को, ना सरकार को कुछ हासिल होगा.

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