Dhanbad

राशन कार्ड है फिर भी घर-घर मांगकर खाने को विवश वृद्धा, दो साल से नहीं मिला राशन

Dhanbad: झारखंड सरकार राज्य में विकास के तमाम दावे करती है. लोगों को हर बुनियादी सुविधा मुहैया करायी जाने की बात की जाती है. लेकिन इन दावों को पोल कोयलानगरी धनबाद के बाघमारा में खुलती दिख रही है.

जहां एक बुजुर्ग महिला को राशन तक नसीब नहीं हो पा रहा. उसके सामने भूखों मरने की नौबत आ गयी है.

इसे भी पढ़ेंःओम बिड़ला चुने गए लोकसभा के स्पीकर, पीएम ने खुद चेयर तक पहुंचाया

पीला कार्ड होने के बावजूद दो साल से नहीं मिला राशन 

राज्य सरकार यूं तो कहती है कि किसी की भी भूख से मौत नहीं चाहिए. और इसके लिए सिस्टम को भी दुरुस्त करने की बात कही जाती है. लेकिन अमूमन इन योजनाओं का लाभ जरुरतमंदों तक नहीं पहुंचता.

झरिया के जोड़ापोखर बस्ती की रहनेवाली बुजुर्ग महिला फूलमनी महताईन के पास पीला कार्ड है. आधार कार्ड भी है. लेकिन दो सालों से उन्हें सरकारी राशन नहीं मिला है.

राशन नहीं मिल पाने के पीछे का कारण वो स्पष्ट नहीं बता पा रही है. लेकिन सिस्टम में कमी का खामियाजा इस ढलती उम्र में फूलमनी को भरना पड़ रहा है.

इस उम्र में महिला घर-घर मांग कर खाने को विवश है. पड़ोसियों के रहमो-करम पर ही उसकी जिंदगी चल रही है. यहां तक की जिस कच्चे मकान में फूलमनी रहती है, वो भी किसी ने दया कर उसे दिया है.

इसे भी पढ़ेंःदर्द-ए-पारा शिक्षक: कर्ज बढ़ा तो पत्नी ने कौशल विकास के तहत कर ली नौकरी, मगर उस काम से  महुआ चुनना बेहतर

Related Articles

Back to top button