
Ranchi : राजधानी रांची के सभी वार्डों से मुख्य सड़कों तक आधी-अधूरी सफाई होने की बात हमेशा चर्चा में रही है. रोजाना डोर-टू-डोर कचरा उठाव नहीं होने से लोग रांची नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहते है. दरअसल, सफाई काम पूरा नहीं होने के पीछे का एक प्रमुख कारण निगम में सफाईकर्मियों की कम संख्या का भी होना है. निगम के स्वास्थ्य शाखा के मुताबिक राजधानी में अभी 1700 कर्मी ही रोजाना विभिन्न वार्डों में काम कर रहे है. जबकि इस काम के लिए औसतन करीब 4000 से अधिक कर्मी की जरूरत है. सफाईकर्मियों की संख्या का कम होने का असर यह होता है कि लोग या तो घरों में कचरा जमा करके रखते है या सड़क के किनारे ले जाकर फेंक देते है. इससे उस इलाके में महामारी फैलने का खतरा बना रहता है.
इसे भी पढें :पलामू: सरना धर्म कोड लागू करने के लिए बनायी मानव श्रृंखला, महिलाओं ने निभायी भागीदारी
हर वार्ड के लिए चाहिए करीब 100 कर्मी
रांची नगर निगम में कुल 53 वार्ड है. औसतन एक वार्ड की आबादी करीब 50,000 है. वार्ड में कम से कम 100 सफाईकर्मियों की जरूरत है. लेकिन एक वार्ड में सफाई का पूरा जिम्मा केवल 35 कर्मी ही संभाल रहे है. इससे सफाई का काम बुरी तरह से प्रभावित होता है. कम सफाईकर्मी होने के कारण वार्डों में नालियों की सफाई कई दिनों तक नहीं होती है. किसी दिन नाली की सफाई होती है, तो किसी दिन सड़कों पर झाड़ू लगता है. कभी सड़कों से कूड़ा नहीं उठ पाता है.
इसे भी पढ़ें :कृषि विधेयक पर राज्यसभा में हंगामा, विपक्ष ने रूल बुक फाड़ी, उपसभापति की माइक टूटी
दूसरे शहरों की तुलना में रांची में काफी कम है सफाईकर्मी
रांची नगर निगम में सफाईकर्मियों की कम संख्या की जानकारी निगम के अधिकारियों को भी है. स्वास्थ्य शाखा मानता है कि दूसरे शहरों की आबादी की तुलना में रांची की आबादी काफी अधिक है. लेकिन वैसे शहरों में सफाईकर्मी रांची की तुलना में काफी अधिक है. इसमें इंदौर, चंडीगढ़ जैसे शहरों को गिना जा सकता है. बता दें कि राजधानी बनने के बाद रांची नगर निगम की आबादी में काफी इजाफा हुआ है. वर्तमान में आबादी करीब 15 लाख के करीब है. इतनी आबादी में शहर की सफाई व्यवस्था को पूरा करने के लिए 4000 कर्मियों की जरूरत है, लेकिन काम अभी केवल 1700 कर्मी ही कर रहे है.
इसे भी पढ़ें :67 साल में देश पर 54.90 लाख करोड़ का कर्ज, 6 साल के मोदी काल में बढ़कर हुआ 101.03 लाख करोड़




