
RANCHI: राज्य के बेरोजगारों को मिलने वाली मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना की कवायद शुरू हो गयी है. जिलों में उम्मीदवारों से आवेदन मांगना शुरू कर दिया है. पर इस योजना का लाभ देने की शर्त ऐसी है कि इसका लाभ वैसे ही आवेदकों को मिलेगा जिन्होंने सरकारी आईटीआई या पॉलिटेक्निक से पढाई की हो. जिलों की ओर से आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गयी है. जारी विज्ञापन में स्पष्ट लिखा हुआ है कि सरकारी आईटीआई और सरकारी पॉलिटेक्निक से कोर्स उत्तीर्ण ही इस योजना के योग्य होंगे.
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जिलों में शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया
मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया जिलों में शुरू हो गयी है. अभी लोहरदगा, खूंटी, लातेहार और पलामू जिले आवेदन मांग रहे हैं. पर जो शर्त रखी गयी है उसके हिसाब से बड़ी संख्या में उम्मीदवार को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा. राज्य में सरकार की ओर से संचालित आईटीआई और पॉलिटेक्निक की संख्या लगभग एक सौ के करीब है. जिसमें 42 पॉलिटेक्निक संस्थान हैं. और 58 आईटीआई हैं. झारखंड में इस संस्थानों से औसतन सात हजार स्टूडेंट्स हर साल कोर्स पूरा करते हैं. जबकि निजी आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थान कि संख्या एक हजार के करीब है. निजी आईटीआई और पॉलिटेक्निक से तकरीबन 10 हजार स्टूडेंट्स हर साल कोर्स पूरा करते हैं. उदाहरण के तौर पर देखें तो एक साल में निजी संस्थान से कोर्स पूरा करने वाले एक लाख से अधिक स्टूडेंट्स वंचित रह जायेंगे.
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आवेदन की कतार में कौशल विकास के 70 हजार स्टूडेंट्स
मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना की कतार में न केवल आईटीआई और पॉलिटेक्निक किये हुए लोग हैं बाकि स्किल डेवलपमेंट से भी 70 हजार से अधिक लोग हैं. झारखंड स्किल डेवेलपमेंट मिशन सोसायटी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 71,001 लोग हैं जिन्होंने ट्रेनिग पूरा कर सर्टिफिकेट लिया है.
इनमें सक्षम झारखंड कौशल विकास योजना के तहत 37314 लोगों को, एक्सेल योजना के तहत 3708 लोगों को, दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र के तहत 29 606 लोगों को और आरपीएल योजना के तहत 373 लोगों को ट्रेनिंग पूरा करने के बाद सर्टिफिकेट दिया गया है.




