
Ranchi: नियुक्ति वर्ष में नौकरी की राह देख झारखंड के युवा अब एक बार फिर आंदोलन की राह में हैं. युवाओं को न तो नौकरी मिली और न ही रद्द किये गये विज्ञापन को फिर से जारी किया गया. नयी नियमावली बनाने के नाम पर पूर्व की 4896 रिक्त पदों में नियुक्ति का छह विज्ञापन रद्द कर दिया गया. उसके बाद केवल एक विज्ञापन जारी किया गया जो महज 956 पद का है. संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा के नाम से निकाला गया यह विज्ञापन फॉर्म भरने से पहले ही विवाद में आ गया है.
इसे भी पढ़ें : धनबाद: HURL-SINDRI के कैपटिव पावर प्लांट में हादसा, दो मजदूर झुलसे
छह विज्ञापन से 4896 रिक्त पदों पर होनी थी बहाली
नयी नियुक्ति नियमावली के नाम पर जिन प्रक्रियाधीन विज्ञापन को रद्द किया गया है उससे कुल 4896 युवाओं को नौकरी मिलनी थी. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जिन नियुक्तियों को रद्द किया गया है उसमें झारखंड उत्पाद सिपाही के 518, स्पेशल ब्रांच आरक्षी (क्लोज कैडर) के 1012 पद, झारखंड एएनएम (नियमित) के 1791 पद, झारखंड एएनएम (बैकलोग) के 295 पद, कारा चालक और झारखंड संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा के 1280 पद पर नियुक्ति होनी थी.
तीन विज्ञापन में घटती गयी रिक्तियां
रद्द किये गये विज्ञापन में से झारखंड संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (सीजीएल) के नाम से नया विज्ञापन जारी किये गया है. यह विज्ञापन तीन बार निकाला गया. हर बार रिक्तियों की संख्या घटती ही गयी है. साल 2015 पहली बार निकाले गये विज्ञापन में रिक्तियों की संख्या 1280 थी. फिर जब साल 2019 में विज्ञापन निकाला गया था रिक्तियों की संख्या लगभग 1100 हुई. जब नयी नियुक्ति नियमावली बनने के बाद विज्ञापन जारी किया गया तब रिक्तियां महज 956 रह गयी हैं.
कभी उम्र सीमा, तो कभी भाषा का विवाद
झारखंड संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (सीजीएल) के लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन 15 जनवरी से शुरू होना है. जबकि एप्लीकेशन शुरू होने से पहले ही विवाद होने लगा है. पहला विवाद तो उम्रसीमा को लेकर हो रहा है. दरअसल 2021 के विज्ञापन में आयोग ने जो कट ऑफ डेट मांगा है, वहां इसी परीक्षा के लिए पूर्व में निकाले 2016 और 2019 के समय के कट ऑफ डेट से काफी अलग है. साल 2016 के विज्ञापन में अधिकतम कट ऑफ डेट 1 अगस्त 2015 रखा गया था. साल 2019 में जब दूसरी बार विज्ञापन निकाला गया उस दौरान अभ्यर्थियों के लिए विभिन्न पदों के लिए अधिकतम कट ऑफ डेट 1 अगस्त 2010 और 1 अगस्त 2015 रखा गया. फिलहाल जो विज्ञापन निकला है उसमें अधिकतम कट ऑफ डेट 1 अगस्त 2021 रखा गया है. इस वजह से बड़ी संख्या में युवा परीक्षा में शामिल होने से वंचित हो जायेंगे.
इसके अतिरिक्त जो विवाद हो रहा है वो जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा को लेकर है. बोकारो, धनबाद सहित कई जिलों में भोजपुरी-मगही जैसी भाषा को जोड़ दिया गया है. इससे भी विवाद हो रहा है.
इसे भी पढ़ें : रिम्स में कोरोना मरीजों के लिए 366 बेड तैयार, 63 मरीज इलाजरत




