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कृषि आशीर्वाद योजना फॉर्म के नाम पर सरकार कर रही किसानों को गुमराह, फॉर्म में कहीं नहीं लिखा योजना का नाम : सुभाष मुंडा

Ranchi : कृषि आशीर्वाद योजना के नाम पर सरकार किसानों को गुमराह कर रही है. चुनाव को ध्यान में रखकर सरकार ऐसा कर रही है. अगर सरकार किसानों का हित ही चाहती है, तो कृषि आशीर्वाद योजना से डीबीटी हटाये. योजनाओं को डीबीटी से जोड़कर सरकार सिर्फ किसानों का अधिकार मार रही है. उक्त बातें भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य कमिटी सदस्य सुभाष मुंडा ने कहीं. वह मंगलवार को पार्टी की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि किसानों को पांच हजार रुपये देने की बात ठीक है, लेकिन उसे डीबीटी और जटिल सरकारी प्रक्रियाओं से जोड़ना गलत है. पहले भी जन वितरण प्रणाली में देखा जा चुका है कि डीबीटी के कारण कई लोग ऐसी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं. ऐसे में इस योजना का भी यही होगा.

फॉर्म के नाम पर छलावा

सुभाष मुंडा ने बताया कि योजना के तहत किसानों के बीच फॉर्म ए, बी और सी बांटे जा रहे हैं. फॉर्म ए में जमीन संबंधी विवरण, बी में आवेदन रैयत वंशावली और प्रपत्र सी में आवेदक का मोबाइल नंबर,  बैंक खाता समेत अन्य जानकारी है. उन्होंने कहा कि सरकार इतनी सारी जानकारी तो ले रही है, लेकिन इन तीनों फॉर्म में कहीं भी योजना के बारे में या झारखंड सरकार की मुहर तक नहीं है. ऐसे में फॉर्म में निहित जानकारियों का प्रयोग किसी भी रूप में किया जा सकता है.

नगड़ी में फेल योजना को बैकडोर से लागू कर रही सरकार

जिला सचिव सुखनाथ लोहरा ने कहा कि नगड़ी में इसी तरह सरकार डीबीटी योजना लागू करना चाहती थी, जिसका विरोध कर ग्रामीणों ने योजना लागू नहीं करने दी. इसी तरह कृषि आशीर्वाद योजना को भी सरकार डीबीटी से जोड़ रही है, जो गलत है. किसानों को इससे लाभ मिलनेवाला नहीं. उन्होंने कहा कि सूखाग्रस्त इलाकों के नाम पर भी सरकार ऐसा ही कर रही है.

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