न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

डी-फ्लोराइडेशन के लिए केंद्र ने दी थी 102 करोड़ 60 लाख की राशि, अब तक नहीं हो पाया टेंडर

पलामू, चतरा, हजारीबाग, गढ़वा में पानी में अधिक पाया जाता है फ्लोराइड

36

Chhaya

Ranchi : डी-फ्लोराइडेशन युक्त पानी के लिए राज्य में दो बार टेंडर निकाला गया. 27.7.2018 को भी इस संबध में टेंडर निकाला गया. वहीं इससे पहले भी 2017 में भी टेंडर निकाला गया, लेकिन अभी तक राज्य में इससे संबधित टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है. जबकि योजना केंद्र सरकार की है. डी-फ्लोराइडेशन के लिए राज्य के पास 102 करोड़ 60 लाख की राशि है और राज्य के अधिकांश जिले ऐसे ही हैं, जहां फ्लोराइड युक्त पानी पाया जाता है. टेंडर के तहत राज्य के 48 स्थानों पर काम करना है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विभाग ने 2018 में तीन कंपनियों को इसके लिए चयनित किया. जिसमें राइट वाटर नागपुर, एचईएस नागपुर और छोटानागपुर कंपनी डाल्टनगंज है. जिन्हें 21 स्थानों पर काम करने के लिए चयनित किया गया. लेकिन विभाग और इन तीन कंपनियों के बीच आपसी विवाद के कारण ही टेंडर पूरी नहीं हो पा रही. जबकि अन्य 27 स्थानों के लिए टेंडर नहीं की गई.

राज्य के लघु उद्यमियों को नहीं दी गई प्राथमिकता

hosp1

इस बारे में राज्य के कई लघु उद्यमियों ने बताया कि इसमें उन्होंने भी टेंडर भरा था. जबकि 2017 की टेंडर प्रक्रिया में कहा गया था कि 2014 प्रोक्यूरमेंट पॉलिसी के तहत किसी भी योजना में राज्य के लघु उद्यमियों को प्राथमिकता देना है. इस बारे में विकास विजयवर्गीय का कहना है कि 2017 में तो टेंडर किसी को मिला ही नहीं और 2018 में विभाग ने फिर से टेंडर निकाला. लेकिन उस वक्त राज्य के लघु उद्यमियों को टेंडर भरने से वचिंत कर दिया गया. इसके अलावा उन्होंने कहा कि राज्य के उद्यमियों के पास सोलर बेस्ड काम के लिए अनुभव नहीं है. जबकि मुख्य सचिव को भी इस संबध में पत्र लिखा जा चुका है.

सोलर बेस्ड करना है काम

योजना को पूरी तरह से सोलर बेस्ड करना है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली कंपनियों के पास भी सोलर बेस्ड पंप और मोटर आदि होना चाहिए. राज्य के लघु उद्यमियों के पास सीआइएसआर और नीरी से प्रमाण पत्र प्राप्त है. जबकि राज्य में इससे पहले कोई भी योजना सोलर बेस्ड नहीं होने के कारण उद्यमियों के पास अनुभव की कमी है. ऐसे में विभाग राज्य सरकार की 2014 प्रोक्यूरमेंट पॉलिसी को भी नकारते हुए दूसरे राज्य के कंपनियों को योजना देना चाह रही है.

कई जिलों में पाया जाता है फ्लोराइड युक्त पानी

डॉक्टरों के मुताबिक, पानी में फ्लोराइड की सीमित मात्रा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है. लेकिन अधिक मात्रा में पानी में फ्लोराइड के होने से ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है. राज्य के कई जिले हैं, जहां पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पायी जाती है. जिसमें पलामू, चतरा, हजारीबाग, गोड्डा, धनबाद आदि है. यह योजना विशेषकर गांवों के लिए है.

हड्डी को करती है कमजोर

पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने से यह हड्डियों को अंदर से खोखला करती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. वहीं इस बारे में डॉक्टर अनुराधा प्रसाद ने जानकारी दी कि इससे दांत में पीलापन, शरीर का दुबला होना, बाल झड़ना, नाखुनों में धब्बे आना आदि बीमारियां हो सकती हैं.

विभागीय सचिव ने नहीं उठाया फोन

इस संबध में कई बार विभागीय सचिव आराधना पटनायक से संपर्क करने की कोशिश गई, लेकिन  उन्होंने फोन नहीं उठाया.

इसे भी पढ़ें – राजस्व और इंजीनियर की कमी से जूझ रहा RRDA, योजनाओं की प्लानिंग व मॉनिटरिंग प्रभावित

इसे भी पढ़ें – सरयू राय यूं ही नहीं हैं व्यथित, भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार व पार्टी दोनों का चुप रहना संदिग्ध

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: