
New Delhi : केंद्र सरकार ने मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है कि टाटा समूह ने कर्ज में डूबे एयर इंडिया के लिए बोली जीती है. ब्लूमबर्ग ने पहले जानकारी दी थी कि सरकार को नियंत्रण सौंपने के बाद टाटा समूह राष्ट्रीय वाहक को आधी सदी से अधिक समय बाद फिर से हासिल कर लेगा. वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, “एआई विनिवेश मामले में भारत सरकार द्वारा वित्तीय बोलियों को मंजूरी देने वाली मीडिया रिपोर्ट गलत हैं. मीडिया को सरकार के फैसले के बारे में सूचित किया जाएगा, जब यह लिया जाएगा.”
Media reports indicating approval of financial bids by Government of India in the AI disinvestment case are incorrect. Media will be informed of the Government decision as and when it is taken. pic.twitter.com/PVMgJdDixS
— Secretary, DIPAM (@SecyDIPAM) October 1, 2021
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टाटा समूह और स्पाइसजेट ने लगाई थी बोली
टाटा समूह और स्पाइसजेट के अध्यक्ष अजय सिंह ने सितंबर महीने की शुरुआत में सरकारी कंपनी एयर इंडिया के लिए बोली लगाई थी. दिसंबर 2020 में, सरकार ने एयर इंडिया के विनिवेश के लिए रुचि पत्र आमंत्रित किया था. चार बोलीदाताओं ने संकटग्रस्त एयरलाइन को लेने की दौड़ में प्रवेश किया था, लेकिन टाटा समूह और स्पाइसजेट के सीईओ अजय सिंह ही अंतिम चरण में पहुंचने वाले थे.
टाटा समहू है शीर्ष बोली लगानेवाला
ब्लूमबर्ग न्यूज ने पहले बताया था कि टाटा संस ने संकटग्रस्त राष्ट्रीय वाहक की वीडियो बोली जीती है. इसके साथ एयर इंडिया 68 साल के अंतराल के बाद फिर से टाटा समूह के तहत उड़ान भरेगी.
एक अन्य रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि टाटा शीर्ष बोलीदाता के रूप में उभरा है, लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में एयर इंडिया के निजीकरण पर मंत्रियों की समिति की बैठक और अंतिम मंजूरी के बाद ही की जाएगी.
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1932 में बनी थी टाटा एयरलाइंस
एयरलाइन की स्थापना 1932 में हुई थी और एयरलाइन का आधिकारिक नाम टाटा एयरलाइंस था. 1946 में, टाटा संस के विमानन प्रभाग को एयर इंडिया के रूप में सूचीबद्ध किया गया था और 1948 में एयर इंडिया इंटरनेशनल को यूरोप के लिए उड़ानों के साथ लॉन्च किया गया था. 1953 में, एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया था.
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एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जायेगी
इस बार, केंद्र सरकार एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कर रही है, जिसकी प्रक्रिया जनवरी 2020 में शुरू हुई थी. इस प्रक्रिया को कोरोना महामारी के कारण रोक दिया गया था. अप्रैल 2021 में फिर से प्रक्रिया शुरू हुई है. वित्तीय बोली लगाने का अंतिम दिन 15 सितंबर 2021 था.
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