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कोरोना में नक्सलियों के सामने गोल्डन चांस: मुख्यधारा में लौटें, पुलिस करायेगी इलाज

Ranchi : आतंक का पर्याय बने नक्सली संगठन अब कोविड संक्रमण के तीसरे लहर की आशंका के बीच दहशत में हैं. यूं तो पूरा देश कहें या पूरा विश्व ही कोरोना संक्रमण की तीसरे लहर की आशंका के बीच दहशत में है. पर जंगल में रहकर चुनी हुई सरकार को हटाकर सत्ता में बैठने का ख्वाब देखने वाले माओवादियों का हाल कोरोना से बेहद बुरा है.

हालांकि तीसरी लहर के पहले नक्सलियों के पास गोल्डन चांस है. झारखंड पुलिस मुख्यालय की तरफ से नक्सलियों को यह ऑफर दिया गया है कि अगर वे मुख्यधारा में लौट आते हैं तो उनके इलाज की सारी व्यवस्था पुलिस की तरफ से की जाएगी.

झारखंड पुलिस के आईजी अभियान अमोल होमकर ने बताया कि नक्सली संगठन थाना से लेकर मुख्यालय तक किसी से भी संपर्क कर मुख्यधारा में जुड़ सकते हैं. वह मुख्यधारा में जुड़ने के लिए आत्मसमर्पण करें. पुलिस का यह वादा है कि उनके इलाज की सारी व्यवस्था की जाएगी.

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वहीं झारखंड की अलग-अलग जेलों में बंद लगभग 1000 से अधिक नक्सली कैडरों को वैक्सीन लग चुकी है. आत्मसमर्पण कर चुके कुख्यात नक्सली कमांडर कुंदन पहन हो या फिर बड़ा विकास सभी जेल में रहते हुए वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके हैं. इसके अलावा झारखंड के सभी जिलों में 90% तक कैदियों को वैक्सीन के दोनों डो भेज दिए जा चुके हैं.

झारखंड में नक्सली संगठनों को कोरोना संक्रमण के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. भाकपा माओवादियों की सेंट्रल कमेटी के द्वारा हाल में ही जारी किये गये पत्र में यह भी जिक्र है कि माओवादियों को बीमारी की वजह से काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

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खुफिया एजेंसियों के द्वारा भी कोरोना संक्रमण के नक्सली संगठनों पर प्रभाव को लेकर एक रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में सरायकेला-खरसावां, रांची और चाईबासा के ट्राइजंक्सन में कोरोना के कारण दो माओवादी जोनल कमांडरों की मौत हो चुकी है. वहीं दस से अधिक माओवादी दस्ते के कैडर कोविड पॉजिटिव हैं.

जानकारी के मुताबिक, कोविड के कारण छतीसगढ़ और झारखंड में माओवादी संगठन को बड़ा नुकसान हुआ है. बस्तर में कोविड के कारण अबतक 13 से अधिक माओवादी अपनी जान गवां चुके हैं.

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