
Manoj Kumar Pintu
Giridih: कोयला चोरी के मामले को लेकर गिरिडीह प्रशासन का रवैया सुस्त नजर आ रहा है. ब्रह्मडीहा खदान में सीबीआइ के जब्त भंडारण से तीन हजार टन कोयला चोरी का खुलासा हुए करीब दो सप्ताह से अधिक हो चुका है, लेकिन गिरिडीह पुलिस की जांच की अब तक कोई शुरुआत ही दिख रही है.
ऐसे में माना जा रहा है कि अब पुलिस भी दबाव में आकर ब्रहमडीहा खदान के कोयला चोरों को बचा रही है. एक तरफ एसपी अमित रेणु खुद को इस परेशानी से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ सदर एसडीपीओ कुमार गौरव जांच चल रही है का रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं.
इसे भी पढ़ेंःकंपनी ने नौकरी से निकला, तनाव में आकर युवक ने की आत्महत्या
चोरी के दो हफ्ते बाद भी मामला दर्ज नहीं
हैरान करने वाली बात तो यह भी है कि जांच शुरू हुए दो सप्ताह बीतने को है. और इतने बड़े पैमाने पर हुए कोयला चोरी के मामले में अब तक मुफ्फसिल थाना में कोई केस तक दर्ज नहीं किया गया. ब्रह्मडीहा खदान के कोयला चोरों की पहचान करने में दो सप्ताह बाद भी पुलिस नाकाम है.
बहरहाल, जांच के नाम पर पुलिस किस तरह से आईवॉश करती है. यह अब साफ तौर पर दिख रहा है. वैसे गिरिडीह पुलिस के साथ-साथ राज्य पुलिस भी दिग्भम्रित होती दिख रही है. क्योंकि जब जांच शुरु हुई, तो शुरुआती जांच में यही निकल कर सामने आया कि ब्रहमडीहा खदान से गायत्री इंटरप्राईजेज के फर्जी जीएसटी दस्तावेज तैयार कर तीन हजार टन कोयला गोंविदपुर के दर्जन भर हार्डकोक प्लांट्स में खपाया गया.
दिलचस्प बात यह भी है कि दो सप्ताह के बाद भी पुलिस की जांच अब तक यही दब कर रह गई है. बता दें कि तीन हजार टन कोयले की चोरी लॉकडाउन के पहले जनवरी माह से लगातार होती रही. और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी. या यूं कहा जाये कि जानकारी रहने के बाद भी पुलिस सोई रही.
इसे भी पढ़ेंःपाकुड़: 30 हजार घूस लेते जूनियर इंजीनियर को ACB ने किया गिरफ्तार




