News Wing Simdega, 22 November: सिमडेगा सदर अस्पताल में मंगलवार की रात एक प्रसूता और बच्चे की मौत हो गयी. इसके बाद बुधवार को सुबह मृतकों का शव लेने अस्पताल पहुंचे परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया. उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की लापरवाही से जान गयी है. बताया जाता है कि जलडेगा के तिलाईजारा की रहने वाली गर्भवती कांति देवी को प्रसव के लिये शनिवार को सदर अस्पताल लाया गया. इस दौरान कांति देवी के स्वास्थ्य की जांच की गयी. जांच में 8 ग्राम खून पाया गया. मंगलवार की रात 10 बजे के करीब कांति की स्थित को देखते हुए डॉ ओलोंपिया केरकेट्टा को बुलाया गया.
डॉ ओलोंपिया केरकेट्टा ने 10 बजे से ही कांति देवी का इलाज शुरू किया. रात को 11 बजे के करीब कांति देवी को मरा हुआ बच्चा पैदा हुआ. प्रसव के बाद कांति देवी को घबराहट होने लगी. इसी दौरान वह बेहोश हो गयी और रात 11.45 बजे के करीब उसकी भी मौत हो गयी.महिला की मौत के बाद हंगामा कर रहे परिजनों ने कहा कि तीन दिन भर्ती रहने के बाद भी अगर चिकित्सकों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो उसे रेफर क्यों नहीं किया गया.
गर्भवती होने के बाद कांति को नहीं मिली थी सरकारी सुविधाएं
गर्भवती माता की देख-रेख तथा उसके इलाज के लिये सरकार करोड़ों रूपये खर्च कर रही है. गर्भवती महिला का मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्ड बना कर लगातार जांच किया जाता है तथा उसे दवाईयां दी जाती है. लेकिन कांति देवी के साथ ऐसा नहीं हुआ. कांति देवी का गर्भवती होने के बाद कार्ड नहीं बना. उसे कभी कैल्शियम या आयरन को गोली नहीं दी गयी. कांति देवी को अगर गर्भवती होने के समय से ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली सुविधा व दवाईयां दी जाती तो शायद उसकी जान नहीं जाती.
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