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हाथियों के उपद्रव रोकने के लिये हर प्रयोग में वन विभाग असफल, अब लाल मिर्च पाउडर का सहारा

कभी ऊंट, कभी एंक्यूलाइजर गन, तो कभी पटाखे जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की गई, पर सफल नहीं हो पाया विभाग

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Ranchi : हाथियों से पार पाना वन विभाग के लिये अब चुनौती बन गई है. प्रयोग पर प्रयोग किये जा रहे हैं, फिर भी कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है. कभी ऊंट से हाथियों को भगाने का प्रयोग किया गया, लेकिन वो विधि भी काम नहीं आया. सोनाहातू के बारेंदा और आस-पास के जंगलों में ऊंट की तैनाती की गई.

तर्क दिया गया कि ऊंट में एक खास महक होती है, जिसे हाथी बर्दास्त नहीं करता. वहीं ऊंट की गर्दन काफी लंबी होती है, हाथी समझता है कि वह बड़ा जानवर होगा,इस मनोवैज्ञानिक असर के कारण हाथी वापस लौट जाता है. यह प्रयोग भी सफल नहीं हो पाया.

फिर पटाखे जलाकर हाथियों को भगाने का प्रयोग हुआ. यह भी सफल नहीं हो पाया. एंक्यूलाइजर गन से हाथियों को बेहोश करने का प्रयोग हुआ, लेकिन वन कर्मियों का निशाना सटीक नहीं बैठा और हाथी भड़क गये. असम से कुनकी हाथी लाकर हाथियों को भगाने की योजना बनाई गई, यह योजना  धरातल पर ही नहीं उतरी. अब लाल मिर्च पाउडर का प्रयोग किया जा रहा है.

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लाल मिर्च पाउडर से कैसे भागेंगे हाथी

वन विभाग के अनुसार, लाल मिर्च पाउडर को जले हुये मोबिल व ग्रीस में मिलाकर रस्सी में लपेटने की हिदायत वन विभाग ने दी है. विभाग ने कहा है कि इस रस्सी को भंडारित अनाज वाले घरों के चारों और लपेटें. साथ ही हाथी के गांव में प्रवेश की दिशा में रस्सी बांधे. रस्सी के साथ सादा या लाल कपड़ा की पट्टी भी बांधें.

सादा और लाल रंग हाथियों को नापसंद है. खलिहान के चारों ओर गोइठा, लकड़ी का अलाव जलाकर उसमें लाल मिर्च पाउडर डालें. लाल मिर्च के गंध से हाथी नहीं आयेगा. वह वापस लौट जायेगा. अपील भी किया है कि पत्थर, तीर, जले टायर और मशाल से हाथियों पर प्रहार न करें. पटाखे से हाथी और भड़क जाते हैं.

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दो लाख लोगों को पहुंच चुका है नुकसान

जंगली जानवरों और हाथियों के हमले से अब तक दो लाख लोगों को नुकसान पहुंच चुका है. इसमें फसल, पशु, मकान और अनाज का नुकसान शामिल हैं. हाथियों और जंगली जानवरों के हमले से अब तक 1200 लोगों की मौत हो चुकी है.

इसके एवज में वन विभाग मुआवजे के तौर पर लगभग 13 करोड़ रुपये बांट चुका है. 2000 लोग घायल भी हो चुके हैं. घायलों को लगभग चार करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है.

हाथियों का जारी है हमला

हर महीने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हाथियों का हमला जारी है. हाथियों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो पायी है. हाथियों के भ्रमण का कॉरिडोर नहीं बन पाया. एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर भी अब तक नहीं है. वहीं भालू संरक्षण की ठोस नीति नहीं बन पायी है.

छत्तीसगढ़ की तर्ज पर हजारीबाग में गज परियोजना बनाई गयी थी, वह भी लागू नहीं हो पायी. वन विभाग का वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल भी सक्रिय नहीं हो पाया है.

वन विभाग ने गिनाये हैं हाथियों के हमले के कारण

जनसंख्या में वृद्धि

वन्य जीव के निवास का खंडित होना

हाथियों द्वारा हानी पहुंचाये जाने के खिलाफ प्रतिक्रिया

नये आवास, रेलवे लाइन, बिजली के लाइन का निर्माण

हाथियों के जल , भोजन और सुरक्षित आवास का अभाव

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