
Ranchi : झारखंड विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. सत्र के दूसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हुई. इस दौरान विपक्ष के आजसू विधायक लंबोदर महतो ने संशोधन प्रस्ताव लाया था. लंबोदर महतो के अलावा बिनोद सिंह ने भी संशोधन प्रस्ताव लाया था.
झारखंड विधानसभा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि विपक्षी विधायक ने संशोधन प्रस्ताव वापस लिया. लंबोदर महतो ने अपने संशोधन प्रस्ताव में यह कहा था कि राज्य में झारखंड आंदोलनकारियों के चिन्हितीकरण के लिए आयोग की स्थापना होनी चाहिए.
आयोग के गठन नहीं होने से लगभग 52 हजार आंदोलनकारियों को चिन्हित नहीं किया जा सका है. सरकार ने जवाब के दौरान कहा कि चिन्हितीकरण पर सरकार काम कर रही है.
इस पर लंबोदर महतो ने कहा कि अगर सरकार इस पर विचार करती है तो मैं प्रस्ताव को वापस लेता हूं. ऐसा विधानसभा में पहली बार देखने को मिला. बिनोद सिंह ने भी सरकार के जवाब से संतुष्ट होकर संशोधन प्रस्ताव को वापस ले लिया.
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मनीष जायसवाल का नहीं था संशोधन प्रस्ताव, हो गयी वोटिंग
भाजपा के विधायकों ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध करते हुए वाकआउट कर दिया. उन्होंने यह कहते हुए सदन का बहिष्कार किया कि राज्यपाल का अभिभाषण झूठ का पुलिंदा है. इसके बाद सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हुई.
झामुमो विधायक सरफराज अहमद ने धन्यवाद प्रस्ताव लाया. वहीं लंबोदर महतो और बिनोद सिंह ने इस पर संशोधन प्रस्ताव लाया. जबकि मनीष जायसवाल ने कोई संशोधन प्रस्ताव नहीं रखा था, लेकिन जब संशोधन प्रस्ताव पर वोटिंग करायी गयी तो मनीष जायसवाल का भी नाम आसन से लिया गया.
यह भी गौर करनेवाली बात है कि विधायक बिनोद सिंह और लंबोदर महतो ने संशोधन प्रस्ताव वापस ले लिया, तब भी वोटिंग करायी गयी.
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