
Ranchi: किसानों को ऋण माफी के लिए संघर्ष जारी रखना चाहिये. केंद्र सरकार लगातार किसान और मजदूर विरोधी नीतियां बना रही है.
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया. जबकि इसके लिए राष्ट्र स्तर पर आंदोलन हो रहे है.
उक्त बातें अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक महेंद्र पाठक ने कही. वे मंगलवार को एआइकेएससीसी की ओर से आयेाजित राज्य के पहले कंवेशन को संबोधित कर रहे थे.
इस दौरान महेंद्र ने कहा कि सरकार को ऋणग्रस्तता से किसानों की मुक्ति संबधी विधेयक 2018 को पारित किया जाना चाहिए.
राष्ट्र स्तर पर किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से कई बार दिल्ली में आंदोलन किया गया. जिसमें हजारों की संख्या में किसान शामिल हुए.
लेकिन केंद्र सरकार किसानों की मांगों को नहीं मानी. पिछले कुछ सालों में कर्ज के कारण सबसे अधिक किसानों ने आत्महत्या की.
इसके बाद भी सरकार किसानों के कर्ज माफी पर कुछ नहीं कर रही. वर्तमान समय में जरूरी है कि किसानों के कर्ज माफी पर अधिक जोर दिया जाये.
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आत्महत्या करने वाले किसानों का सभी बकाया माफ हो
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव सुरजीत सिन्हा ने कहा कि ठेका खेती के नाम पर किसानों का दोहन किया जाता है. सरकार कॉरपोरेट लूट से किसानों को बचाने की योजना बनाये.
पिछले कुछ सालों में जिन किसानों ने आत्महत्या की है, सरकार उनका कर्ज समेत सभी बकाया माफ करे और ऐसे परिवार के बच्चों को विशेष अवसर दिये जायें.
सुरजीत ने कहा कि मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध होते रहे है. इसके बाद भी किसान मजदूर हित, वन अधिकार कानून आदि देश में तेजी से कमजोर हुए है.
जो यह बताता है कि सरकार कॉरपोरेट घरानों को बसाने के लिए योजनाएं बना रही है. वर्तमान में जो बजट सरकार ने पेश किया है. उसका भी विरोध किया गया.
केंद्र सरकार के काल में किसानों और मजदूरों का शोषण अधिक हुआ है.
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ये मांगें की गयीं
इस दौरान संरक्षणात्मक सिंचाई की व्यवस्था करने, पिछले दिनों आत्महत्या करने वाले किसानों का ऋण माफ, किसानों को कारॅपोरेट लूट से बचाने, किसानों को हर महीने दस हजार रूपये का पेंशन और स्वास्थ्य कवरेज समेत अन्य मांगें की गयीं.
मौके पर पूरन महतो, राजेंद्र गोप समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
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