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धान क्रय केंद्रों के बजाए खुले बाजार में धान बेच रहे किसान, 150 रुपये बोनस की सरकारी घोषणा भी नाकाम

Chhaya

Ranchi :  राज्य सरकार किसानों को राहत देने के लिये नयी-नयी योजनाएं बना रही है. लेकिन इन योजनाओं का  खास लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है. ये खुद सरकारी आंकड़े ही बताते हैं. राज्य में धान की खेती बहुतायत में की जाती है. खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से राज्य के अलग- अलग हिस्सों में धान क्रय केंद्र खोले जाते हैं. एक ब्लॉक में एक क्रय केंद्र खोलने का प्रावधान भी है. लेकिन राज्य के किसान इन क्रय केंद्रों पर धान नहीं बेचते.

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 में एक लाख 21 हजार 204 किसानों का निंबधन किया गया. जबकि 34 हजार 247 किसानों ने ही धान क्रय केंद्र पर धान बेचा. इसी तरह से साल 2017-18 में भी एक लाख 14 हजार 276 किसानों का निंबधन हुआ. जबकि मात्र 34 हजार 615 किसानों ने ही धान क्रय केंद्र पर धान बेचा. साल 2016-17 में 93 हजार 537 किसानों का निंबधन हुआ और 39 हजार 475 किसानों ने क्रय केंद्र पर धान बेचा.

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किस साल कितने धान की प्राप्ति हुई

किसानों के धान क्रय केंद्र पर नहीं पहुंचने पर खाद्य आपूर्ति विभाग की धान प्राप्ति में भी कमी आयी है. साल 2018-19 के लिये चार लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था. खुद खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने कई बार घोषणा भी की थी, कि वित्तीय वर्ष में चार लाख टन धान खरीद की जायेगी. इस साल सरकार को दो लाख 27 हजार 858 मिट्रिक टन धान की प्राप्ति हुई.

वहीं साल 2017-18 में दो लाख 13 हजार 68 मिट्रिक टन धान की प्राप्ति हुई थी. इसी तरह से 2016-17 में दो लाख सात हजार 137 मिट्रिक टन धान प्राप्त हुआ था. राज्य में धान क्रय केंद्र लैंप्स की ओर से की जाती है. जबकि इन धानों को पैक्स की ओर से बाजार में लाने की प्रक्रिया की जाती है.

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पैसे मिलने में लगता है लगभग डेढ़ से तीन माह

किसानों के मुताबिक, वे धान क्रय केंद्र पर धान नहीं बेचना चाहते, क्योंकि डीबीटी के माध्यम से पैसे मिलने में समय ज्यादा लगता है. जबकि खुले बाजार में धान बेचने से उन्हें तुरंत लाभ मिलता है. किसान नेता सुरजीत सिन्हा ने जानकारी दी कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने में डेढ़ से तीन माह तक का समय लग जा रहा है.

जो किसानों के लिये महत्वपूर्ण है.साथ ही बताया कि खुले बाजार में किसानों को धान की और भी कम कीमत मिलती है. लेकिन पैसे तुरंत मिलते हैं.  इस वजह से ही किसान खुले बाजार को महत्व देते हैं.

पिछले वित्तीय वर्ष में 274 क्रय केंद्र खोले गये थे. इसी तरह साल 2017-18 में लगभग छह सौ क्रय केंद्र खोले गये. किसानों को केंद्र की ओर से 1750 रूपये न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाता है. वहीं राज्य सरकार ने 2018 में कैबिनेट की बैठक में 150 रूपये बोनस देने की घोषणा की थी.

जिसके बाद 1900 न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल रहा है. विभागीय अधिकारियों से जानकारी मिली की आने वाले मानसून सत्र के बाद इस साल के लिये क्रय केंद्र तय किये जायेंगे. जो धान की खेती को ध्यान में रखकर किया जाता है.

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