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रांची में रंगदारी : ठेला-खोमचा लगाने वालों से हर इलाके में अलग-अलग गिरोह करते हैं वसूली

Ranchi. 27 जनवरी को रांची से सबसे सेफ जोन कहे जाने वाले मोरहाबादी मैदान के पास अंधाधुंध गोली चलती है. दो गैंग आपस में खून की होली खेलते हैं. दौड़ा-दौड़ा कर एक दूसरे पर फायरिंग की जाती है. एक की मौत होती है और दो घायल होते हैं. गौर करने वाली बात यह है कि घटना दिन के दो बजे की है. पुलिसिया तफ्तीश में बात सामने आती है कि यह गोली रंगदारी वसूले जाने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है. एक गैंग हावी हो रहा था, तो दूसरे गैंग ने उसके सरगना को ठिकाने लगा दिया.

ऐसा नहीं है कि रांची में रंगदारी सिर्फ मोरहाबादी के आस-पास होती है. ग्रामीण इलाकों से लेकर रांची के पॉस इलाकों तक रंगदारी का खेल आम है. न्यूज विंग आपको सिलसिलेवार तरीके से उन सभी रंगदारों और रंगदारी की कहानी बयां करेगा. पहली किस्त में जानिए कैसे होती है. ठेला-खोमचा लगाने वालों से अवैध वसूली.

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हरेक जगह तय होता है एक रेट

राजधानी रांची के कई इलाके में ठेला-खोमचा लगाने के एवज में प्रति दुकानदार रुपये देने पड़ते हैं. इन दुकानदारों को भले ही चुंगी न देनी पड़े, लेकिन रंगदारी देनी पड़ती है. मिली जानकारी के अनुसार दुकानदारों से अवैध वसूली का एक रेट तय होता है. हालांकि कई जगह मानमाने दाम भी वसूले जाते हैं.

नागबाबा खटाल में पुछताछ करने पर जानकारी मिली की प्रति ठेला 100 रुपये तक की भी वसूली की जाती है, इन इलाको में करीब 70 ठेले-खोमचे लगाये जाते हैं. वही दुकान लगाने वाली महिलाओं से किसी तरह की वसूली नहीं की जाती है. कुछ लोगों ने बताया कि 10 से 20 रुपये तक रोज वसूली की जाती है.

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वहीं रातु रोड से मेट्रो गली तक लगने वाले ठेले का 30 रुपया फिक्स रेट है. रातु रोड इलाके में करीब 210 ठेले खोमचे की दुकान है. इन इलाकोx में हर माह करीब चार लाख रुपये की अवैध वसूली की जाती है.

मोरहाबादी में 289 दुकानें लगायी जाती हैं, जहां प्रति दुकान 20 रुपये के हिसाब से वसूली की जाती है. इलाके के छुटभैये बदमाश इस तरह के अवैध वसूली में शामिल रहता है.

ऐसा नहीं है कि मामले की जानकारी पुलिस को नहीं रहती है. आरोप है कि कई थाना क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस को रंगदारों ने सेट कर रखा है.

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