
Ranchi: उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली मिले, इसके लिये साल 2015 से प्रयास किया जा रहा है. कुछ योजनाएं अभी भी चलायी जा रही है. इसके बाद भी राजधानी में पिछले 15 दिनों में औसतन तीन घंटे बिजली कटी. बिजली अलग-अलग कारणों से कटी.
इस समस्या से निजात पाने के लिये, रांची में अंडरग्राउंड केबलिंग की गयी. 2015 में यह काम शुरू किया गया. फिर भी उपभोक्ताओं को घंटो बिजली कटने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है. फिर चाहे वो मरम्मत कार्य हो, फॉल्ट हो जाने या आंधी बारिश हो. 18 सितंबर से देखें तो हर दो दिन बाद घंटो बिजली कटी है.
दो घंटे से लेकर 13 घंटे तक की बिजली कटौती इस दौरान हुई. जिसमें आंधी-बारिश से लेकर तकनीकी खराबी फॉल्ट भी है. यह कटौती अलग-अलग सब स्टेशन से की गयी. राजधानी में कुल बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगभग साढ़े पांच लाख है.
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20 सितंबर को 13 घंटे कटी बिजली
18 सितंबर को देखें तो हटिया, नामकुम और कांके में लगभग दो घंटे बिजली कटी. बिजली लाइन ट्रिपिंग के कारण कटी. 20 सितंबर को फीडर खराबी के कारण मधुकम में 13 घंटे बिजली कटी. जो रात के 12 बजे से दिन के दो बजे कटी तक रही. 21 सितंबर को मोरहाबादी सरायटांड़ इलाके में डेढ़ घंटे बिजली गुल रही. 23 सितंबर को हटिया और कांके में लगभग तीन घंटे बिजली गुल रही. जो सुबह 8:45 से दिन के 11:15 तक रही. इसी दिन पतरातु में 1:30 में खराबी हुई. जिसके बाद कुछ इलाकों में 5:30 और कुछ इलाकों में 7:30 बजे बिजली आयी. 30 सितंबर को राजभवन सब स्टेशन में आठ से 11 बजे तक बिजली गुल रही. वहीं मोरहाबादी में नौ से दस बजे तक बिजली कटी रही.
दो अक्टूबर की स्थिति
बिजली ट्रांसमिशन की दो अक्टूबर की रिपोर्ट की मानें तो इस दिन कुछ इलाकों में घंटों बिजली कटी. ये कटौती सब स्टेशन और फीडर स्तर पर दर्ज की गयी. बरियातु के बड़गांई में शाम चार से पांच बजे तक एक घंटे बिजली कटी. धुर्वा के कुछ इलाकों में एक घंटे 19 मिनट बिजली कटी. गोंदा के कुछ इलाकों में 24 घंटे बिजली गुल रही.
गवर्मेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज चर्च रोड के पास 17 घंटे बिजली कटी. ओरमांझी ब्लॉक चौक में 4 घंटे 51 मिनट बिजली नहीं रही.
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अंडरग्राउंड केबलिंग कितनी कारगर
साल 2015 में अंडरग्राउंड केबलिंग की शुरूआत की गयी. रांची में पॉलीकैब एजेंसी ने शहरी क्षेत्र में लगभग 140 किलोमीटर एरिया में अडंरग्राउंड केबलिंग की. वहीं साल 2018 में केईआइ एजेंसी को यह काम मिला. तब से लेकर अब तक कंपनी ने मात्र 33 प्रतिशत ही अडंरग्राउंड केबलिंग की. जो की शहरी और ग्रामीण क्षेत्र मिलाकर है. बिजली उपभोक्ताओं को लाभ देने की बात करें तो फिलहाल स्मार्ट मीटर, मीटर रेंट न लेने समेत अन्य योजनाओं पर काम किया जा रहा है. बता दें राज्य में औसतन 1300 मेगावाट बिजली की खपत हर दिन होती है.
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