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स्कूल ड्रेस के इंतजार में बीत गया पूरा साल, अब 10 दिनों में बांटने का आदेश

Ranchi: राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था इन दिनों आदेश पर ही चल रही है. यह आदेश बच्चों को किताब देने, मध्याहन भोजन बांटने से लेकर स्कूल ड्रेस देने तक है. शिक्षा परियोजना की ओर से न तो नये शैक्षणिक सत्र में किताबें दी गयी और न ही स्कूल ड्रेस.

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विभाग की ओर से केवल आदेश ही जारी किया जा रहा है. अव्यवस्था का आलम यह है कि शैक्षणिक सत्र 2019-20 बीत जाने के बाद भी राज्य के सरकारी स्कूल के बच्चों को स्कूल ड्रेस नहीं मिला. अब 10 दिनों के भीतर सरकारी स्कूल के बच्चों को स्कूल ड्रेस उपलब्ध कराने को कहा गया है.

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सभी जिलों को आवंटित हो चुके हैं 206 करोड़ रुपये

राज्य के सभी जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल ड्रेस दिये जाने हैं. राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से स्कूल ड्रेस देने के लिए सभी जिले को 206 करोड़ रुपये दे दिये गये है. स्कूल ड्रेस के लिए यह राशि बच्चों को देने के लिए कहा गया था. जिन बच्चों का बैंक में अकाउंट खोला गया है, उन्हें डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर) के माध्यम से ड्रेस का पैसा देने को कहा गया था.

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जिन बच्चों का बैंक में अकाउंट नहीं खुला है, उन्हें एसएचजी (विद्यालय प्रबंधन समिति) की ओर से स्कूल ड्रेस देना था. लेकिन विभिन्न जिला के स्कूलों की ओर से ऐसा नहीं किया गया. शैक्षणिक सत्र 2019-20 बीत जाने के बाद भी बच्चों को स्कूल ड्रेस नहीं मिला. अब परियोजना की ओर से बीते शैक्षणिक सत्र की गलती को 10 दिनों के भीतर सुधारने का आदेश दिया गया है.

राज्य में साहेबगंज, जामताड़ा, खूंटी और चतरा जिला सहित कई जिले हैं, जहां के बच्चों को स्कूल ड्रेस नहीं मिल पाया. गौरतलब है कि राज्य के सरकारी स्कूल के एपीएल (अपर पोवरटी लाइन यानी गरीबी रेखा से ऊपर) श्रेणी के बच्चों को राज्य सरकारी की ओर से और बीपीएल (बिलो पोवरटी लाइन यानी गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी के बच्चों को समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूल ड्रेस, स्वेटर और जूता-मौजा दिया जाता है.

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