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सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही घाटे में चल रही BCCL की तीन खदानें, कर्मी साहबों के बंगले पर बजाते हैं ड्यूटी

Kumar Kamesh

Dhanbad: लॉकडाउन के कारण घाटे में चल रही बीसीसीएल की कई खदानें इन दिनों सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही हैं. इन खदानों के कर्मी समय पर कोलियरी जाते हैं, लेकिन काम करने के लिए नहीं, बल्कि हाजिरी बनाने के लिए. हाजिरी बनाने के बाद ये कर्मी या तो घर चले जाते हैं या फिर बीसीसीएल के अधिकारियों के बंगले पर ड्यूटी बजाते हैं.

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दो दर्जन से ज्यादा कर्मी हर दिन बना रहे हैं हाजिरी

बीसीसीएल का ईजे एरिया पहले 11 नंबर एरिया के नाम से जाना जाता था. लेकिन इसके आसपास की कई कोलियरियों के घाटे में चलने के कारण 2008 में इन्हें मर्ज कर ईस्टर्न झरिया बनाया गया था. यह निर्णय घाटा कम करने के उद्देश्य से लिया गया था. बावजूद इसके आज भी यह घाटे में चल रहा है.

इसके घाटे में चलने की मुख्य वजह यह है कि इस क्षेत्र की तीन भूमिगत खदानें सिर्फ कागजों पर संचालित की जाती हैं. इन तीनों कोलियरियों से एक छंटाक कोयला का भी उत्पादन नहीं होता है. बावजूद इसके कागज पर इन तीनों खदानों में तीन पालियों में मजदूरों की ड्यूटी लगायी गयी है. इन तीनों खदानों में एक शिफ्ट में हाजिरी बाबू के साथ-साथ माइनिंग सरदार, ओवर मैन सहित दो दर्जन से ज्यादा कर्मी काम पर आते हैं. ऐसे में घाटे में चल रही बीसीसीएल पर यह आर्थिक बोझ नहीं तो और क्या है.

अगर खदानें बंद होंगी तो कर्मियों को करना पड़ेगा ट्रांसफर

इस मामले में मजदूर नेता पंकज पासवान कहते हैं कि बीसीसीएल प्रबंधन के समक्ष सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन खदानों को अगर बंद करने की घोषणा की जाती है तो सबसे बड़ी समस्या इस एरिया के अस्तित्व पर आ जायेगी. क्योंकि खदानों के बंद करने के बाद सबसे बड़ी समस्या कर्मियों के स्थानांतरण की होगी. अगर प्रबंधन कर्मियों का स्थानांतरण दूसरे एरिया में करता है तो इस एरिया का अस्तित्व मिट जायेगा और इसका विलय दूसरे क्षेत्र में हो जायेगा.

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उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधन नहीं जुटा पा रहा बीसीसीएल

बताया जाता है कि ये तीनों खदानें काफी पुरानी और गहरी हैं. जिस कारण यह असुरक्षित हो गयी हैं. जानकारों का कहना है कि बीसीसीएल को सुरक्षा के जो इंतजाम करने चाहिए, वह नहीं कर पा रहा है. उस समय भी जब ये खदानें धरातल पर संचालित थीं, तब भी सुरक्षा के नाम सिर्फ खानापूर्ति की गयी. कोयला निकालने के बाद जो गड्ढे हुए उसे बालू से भरा जाना था लेकिन इन खदानों में बालू का भराव भी सिर्फ कागजों पर हुआ. फलस्वरूप ये खदानें खतरनाक हो गयी हैं. बीसीसीएल को सुरक्षा के जो इंतजाम करने चाहिए, वह नहीं किये जा रहे हैं.

अधिकारियों के बंगले पर नजर आते हैं बंद खदानों के कर्मी

पेन पेपर पर चल रही खदानों में नियुक्त कर्मी अधिकारियों के बंगले पर भी काम करते नजर आते हैं. ऐसे दर्जनों बंगलें है जहां बीसीसीएल मुख्यालय के  वरीय अधिकारियों की नजर है. न्यूजविंग ने संडे ड्यूटी के लिए कर्मियों को अधिकारियों के बंगले में सेवा देने का सवाल जब बीसीसीएल मुख्यालय में रखा तो बीसीसीएल अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई कर्मी अधिकारियों की सेवा में लगे रहते हैं.

ऐसे एक कर्मी के संडे ड्यूटी में लगभग तीन हजार का वेतन बनता है. इस तरह तीनों शिफ्ट में अगर काम लिया जाता है तो एक बंगले में ही दस हजार की राशि खर्च हो जाती है. ऐसे में बीसीसीएल प्रबंधन पर दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ कोयले का उत्पादन नहीं हो रहा है तो दूसरी तरफ कर्मियों को वेतन देना पड़ रहा है.

संसाधन पूरा होने पर शुरू होगा उत्पादन

वही इस मामले में बीसीसीएल के सीएमडी पीएम प्रसाद ने बताया कि ऐसे खदानों पर विशेष नजर रखी जा रही है. साथ ही जो अधिकारी अपने बंगले पर कर्मियों से काम करवाते हैं, उन पर भी कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने बिना उत्पादन भूमिगत खदानें चालू रखने के सवाल पर कहा कि इन खदानों में संसाधन की कमी है. संसाधन पूरा होने पर इन खदानों में भी उत्पादन किया जायेगा. इसलिए कर्मियों का स्थानांतरण दूसरी कोलियरियों में नहीं किया जा रहा है.

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