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Ranchi में मजबूत हो रहा है अफीम का टेरर कनेक्शन! बुंडू, तमाड़, नामकुम, सोनाहातू और राहे इलाकों में हो रही खेती

Dheeraj Kumar

Ranchi: राजधानी रांची में अब बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही है. इसके पहले रांची के सीमावर्ती इलाकों में अफीम की खेती बड़े पैमाने पर हो रही थी. लेकिन अब रांची के बुंडू, तमाड़, नामकुम, सोनहातू और राहे इलाके में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही है.

अफीम के खेतों में मेहनत और उसकी सुरक्षा के लिए कई किसानों को मोटी रकम भी दी जाती है. पुलिस अफीम की खेती को रोकने की कोशिश में लगी है, लेकिन सारी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं. ऐसे में पुलिस को अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं यह जहर नई मुसीबतें न पैदा कर दे. यह नक्सलियों के लिए सबसे बड़ा आर्थिक स्रोत बनता जा रहा है.

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चतरा से पूरे झारखंड में पहुंची अफीम

जानकारों की मानें, तो पहले झारखंड के सिर्फ चतरा जिले में अफीम की खेती होती थी, लेकिन तस्करों की नजर खूंटी जिले के सीधे सादे आदिवासियों पर पड़ी. उन्होंने किसानों को समझाया कि धान की फसल के बाद खेत खाली रहता है. यदि वहां अफीम की खेती की जाए, तो काफी लाभ होगा. अफीम से मिलने वाली आमदनी को देखकर गांव के गांव इसकी खेती करने लगे.

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में 40 लाख रु. किलो तक बिकता है अफीम

अफीम के पौधे का हर कुछ बिकाऊ होता है. पोस्ता दाना से लेकर डंठल और कण तक. एक एकड़ जमीन में करीब 40 किलो अफीम की पैदावार होती है. स्थानीय बाजार में प्रतिकिलो 40 हजार रुपए से लेकर 15 लाख तक इसकी कीमत लगाई जाती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 40 लाख प्रतिकिलो तक इसकी कीमत पहुंच जाती है.

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अफीम तस्कर लीज पर लेते हैं खेत, किसानों को 3 किस्तों में करते हैं भुगतान

अफीम की खेती के लिए तस्कर किसानों से लीज पर खेत लेते हैं. खेती पूरी तरह से अंतराज्यीय गिरोह की देखरेख में होती है. गिरोह के सदस्य ही पैसा लगाते हैं. खेत में मेहनत करने वाले किसानों को तीन किस्तों में पैसे देते हैं. पहली किस्त रोपाई, दूसरी किस्त फसल तैयार होने पर तथा कटाई के वक्त तीसरी किस्त में पूरी राशि देते हैं.

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