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विधानसभा चुनाव : फार्मूले पर लड़ते हैं महागठबंधन के घटक दल, तो JMM  और CONGRESS को छोड़नी होंगी 7-7 सीटें

Nitesh Ojha

Jharkhand Rai

Ranchi :  झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने महागठबंधन के सभी घटक दलों से कहा है कि उनकी पार्टी कम से कम 41 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ेगी.

इसमें सीटिंग सीटों के साथ जिन सीटों पर जेएमएम दूसरे स्थान पर रहा था, वह सीटें भी शामिल हैं. उनके बयान से महागठबंधन के अन्य दलों के नेता सकते में हैं.

जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने हेमंत के बयान पर कहा है कि पार्टी अभी सभी 81 विधानसभा सीटों की तैयारी कर रही है. वहीं कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने हेमंत के आवास पर ही कहा था कि पार्टी कम से कम 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

Samford

इसमें सीटिंग सीटों के अलावा दूसरे स्थान पर रही सीटें भी शामिल हैं. इसमें कोई संदेह नहीं कि उनका बयान हेमंत के बयान के प्रतिरोध में आया है.

इस फार्मूले पर महागठबंधन के अन्य घटक दल (जेवीएम, लेफ्ट और आरजेडी) चुनाव लड़ते हैं, तो बड़े भाई की भूमिका निभाने जा रहे जेएमएम और कांग्रेस को अपने दावे में क्रमशः 7-7 सीटें छोड़नी पड़ सकती हैं. वहीं कुल 13 सीटों को लेकर भी घटक दलों के बीच संघर्ष होता दिख रहा है.

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36 सीटों पर जेएमएम मजबूत, 2 पर कांग्रेस से संघर्ष

हेमंत सोरेन के दावे की अगर 2014 की स्थिति से तुलना करें, तो सीटिंग और दूसरे स्थान पर रहने वाली सीटों की संख्या 36 है. इसमें सीटिंग विधायक 19 हैं और दूसरे स्थान वाली सीटों की संख्या 17 है. 17 सीटों में दो सीटें (जरमुंडी और पाकुड़) ऐसी हैं, जिसपर कांग्रेस के सीटिंग विधायक हैं. जाहिर है जेएमएम को यहां पीछे हटना पडेगा. ऐसे में जेएमएम को केवल 34 सीटों पर ही चुनाव लड़ने को तैयार होना पड़ेगा. ऐसे में कार्यकारी अध्यक्ष के 41 सीटों के दावे से अलग पार्टी को 7 सीट छोड़ना विवशता होगी.

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तो केवल 18 सीटों पर चुनाव लड़ना होगा कांग्रेस को

इसी तरह कांग्रेस के पास वर्तमान में 9 विधायक हैं. इसमें पाकुड, जरमुंडी, जामताड़ा, बरही, बड़कागांव, पांकी, लोहरदगा, कोलेबिरा और जगरनाथपुर सीट शामिल हैं. वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी कुल 9 सीटों (रामगढ़, बेरमो, धनबाद, झरिया, जमशेदपुर ईस्ट, जमशेदपुर वेस्ट, खिजरी, कांके और डाल्टनगंज) पर दूसरे स्थान पर रही थी. इसी फार्मूले पर अगर कांग्रेस काम करती है, तो पार्टी को अपने नेता आलमगीर आलम के दावे से पीछे हटकर 7 सीटें छोड़नी पड़ेगी. यानि पार्टी को महागठबंधन में रहते हुए केवल 18 सीटों पर ही चुनाव लड़ना होगा.

जेवीएम, वामदल और आरजेडी के पाले में कुल 24 सीटें

इसी फार्मूले पर अगर जेवीएम, आरजेडी और वाम दलों के बीच सीटों का बंटवारा होता है, तो जेवीएम के पाले में कुल 14, वाम दलों के पास 4 और आरजेडी को 6 सीटें मिलती दिख रही हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में जेवीएम 8 सीटों पर चुनाव जीता था. इसमें सारठ, पौडेयाहाट, बरकट्टा, सिमरिया, चंदनकियारी, हटिया, लातेहार और डाल्टनगंज सीटें शामिल हैं. वही पार्टी कुल 6 सीटों (महगामा, चतरा, जमूआ, शिकारीपाड़ा, धनवार और मांडर) पर दूसरे स्थान पर रही थी.

मांडर पर चुनाव लड़ने वाले बंधु तिर्की इस समय जेवीएम के सक्रिय नेता है. लेफ्ट ने 2014 के चुनाव में 2 सीट (धनवार, निरसा) जीती थी. 2 सीटों (सिंदरी और बगोदर) पर पार्टी दूसरे स्थान पर थी. आरजेडी उस चुनाव में एक सीट भी नहीं जीत पायी थी. हालांकि कुल 6 सीटों पर वह दूसरे स्थान पर थी.

कुल 13 सीटों पर फंस सकता है पेंच

राज्य की सभी 81 सीटों की स्थिति को देखें, तो घटक दलों के बीच कुल 13 सीटों पर पेंच बनते दिख रहा है. इसमें 5 सीटें ऐसी है, जिसमें पहले और दूसरे स्थान पर महागठबंधऩ के ही घटक दल रहे थे. इसमें पाकुड़ और जरमुंडी सीट कांग्रेस जीती थी, जबकि जेएमएम यहां दूसरे स्थान पर थी. डाल्टनगंज सीट जेवीएम ने जीती थी, लेकिन कांग्रेस यहां दूसरे स्थान पर थी. इसी तरह शिकारीपाड़ा सीट जेएमएम ने जीती थी, जबकि जेवीएम दूसरे स्थान पर रहा था.

वही धनवार सीट वाम दल के पाले में गयी थी, लेकिन वहां जेवीएम दूसरे स्थान पर रहा था. इसके अलावा हुसैनाबाद, भवनाथपुर, तमाड़, हजारीबाग, बोकारो, बाधमारा, सिमडेगा, विश्रामपुर, सीटें पर निर्दलीयों की मजबूती के कारण इसे बांटना घटक दलों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.

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