
Ranchi : झारखंड के पांचवीं विधानसभा चुनाव के पहले चरण में चतरा, गुमला, लोहरदगा, लातेहार, गढ़वा व पलामू के विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होने हैं.
इन छह जिलों में 16 विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां चुनाव होने हैं. इन पांच जिलों में बहुमत की सरकार ने शिक्षा का जमकर प्राइवेटाइजेशन किया है.
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डेढ़ लाख विद्यार्थी इंटर पास होते हैं, आधे चले जाते हैं बाहर
इन छह जिलों से तकरीबन डेढ़ लाख बच्चे हर साल इंटर की परीक्षा पास करते हैं, लेकिन इनमें से लगभग आधे हायर एजुकेशन के लिए दूसरे जिलों में चले जाते हैं.
विद्यार्थियों की सफलता के इस आंकड़े के बाद भी बहुमत वाली सरकार ने एक भी सरकारी कॉलेज नहीं खोला और न ही किसी कॉलेज को मान्यता दी, जबकि इसी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए रामचंद्र चंद्रवंशी ने अपने नाम से विश्वविद्यालय तक खोल लिया.
जिस सरकार को सभी वर्ग के विद्यार्थियों को सुलभ और कम खर्च में शिक्षा देनी था, उस बहुमत वाली सरकार ने केवल पलामू जिले में प्राइवेट विश्वविद्यालय को मंजूरी दे दी.
18 जुलाई 2018 को बहुमत वाली सरकार ने स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के नाम से स्थापित यूनिवर्सिटी को मान्यता दी.
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परिवार के लोगों को नाम से कई शैक्षणिक संस्थान
गौरतलब है कि चंद्रवंशी या उनके परिवार का यह पहला शैक्षणिक संस्थान नहीं है. पलामू और गढ़वा में 15 संस्थान चंद्रवंशी और उनके परिवार के हैं. इनमें से पांच तो उनके मौजूदा मंत्रीत्व काल में ही खुले हैं.
निजी विश्वविद्यालय उनके मौजूदा मंत्रीत्व काल में खुलने वाला उनका छठा शैक्षणिक संस्थान है. इसके पूर्व से ही रामचंद्र चंद्रवंशी की पत्नी के नाम से तेतरी चंद्रवंशी बीएड, डीएलइडी व एमएड कॉलेज, पिता के नाम से सिबेशर चंद्रवंशी इंटर व डिग्री कॉलेज, मां के नाम से लक्ष्मी चंद्रवंशी कन्या उवि चल रहे हैं. इनके अलावा हसेकर नामक स्थान पर 2016 से रामचंद्र चंद्रवंशी के बेटे ईश्वर सागर पीपीपी मोड पर आइटीआइ भी चला रहे हैं.
सात कॉलेजों को मान्यता देनी थी, दी एक को
नीलांबर पितांबर यूनिवर्सिटी के तहत बहुमत वाली सरकार ने 7 मई 2018 को सात विभिन्न कॉलेजों को मान्यता देने की बात कही थी जिसमें से लातेहार में दो, मनिका में एक, गढ़वा में एक, चैनपुर में एक, हुसैनाबाद में एक और छतरपुर में एक कॉलेज को मान्यता देनी थी.
पर नीलांबर-पितांबर विवि के वेबसाइट पर दी गयी जानकारी के अनुसार लातेहार में एक कॉलेज को ही मान्यता दी गयी है. जबकि छह अन्य जगहों पर सरकार के द्वारा न तो एक भी कॉलेज खोले गये और न ही मान्यता दी गयी.
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