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मंदी में इकोनॉमी, रोज बेरोजगार होते हजारों लोग और हम बना दिये गये 370+ve व 370-ve

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Surjit Singh

– बेरोजगारी की दर ने 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया.

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– गाड़ियों की बिक्री 19 साल में सबसे बड़ी गिरावट.

– पैसेंजर कार की बिक्री में 36 प्रतिशत की गिरावट.

– बैंक के पास पैसे नहीं, गाड़ियों को फाइनांस कराना मुश्किल.

– मोबाइल हैंड सेट निर्माण सेक्टर तबाह.

– रिएल एस्टेट में त्राहिमाम, 11 माह के बदले 42 तक एक मकान भी ना बने, तो भी कमी नहीं होगी.

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– इंजीनियरिंग कॉलेजों में ताला लगने की नौबत.

– बड़े कॉलेजों में कैंपस सिलेक्शन कम हो रहा.

– हर दिन हजारों लोग बेरोजगार हो रहे.

तो यह हालात है देश की इकोनॉमी की. इस पर चर्चा कोई नहीं कर रहा. कैरियर काउंसलर विकास कुमार ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा हैः भारत में अभी सिर्फ दो ब्लड ग्रुप के लोग हैं.

370+ve और 370-Ve. विकास कुमार की बात सच ही है. बाकी चीजें कोठी के कंधे पर. बेरोजगारी समस्या नहीं. आर्थिक मंदी से किसी को मतलब नहीं.

बैंक के पास पैसे नहीं हैं. लोगों को लोन लेने में दिक्कत है. मारुति सुजूकी के चेयरमैन आरसी भार्गव के अनुसार, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. नये नियम व बदलावों ने दिक्कतें पैदा की हैं.

कई राज्यों ने रोड टैक्स बढ़ा दिया. इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ा दिया गया. इस कारण ऑटो सेक्टर में मंदी और छंटनी है. इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए सेक्टर तैयार नहीं है.

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विशेषज्ञों के मुताबिक, रिएल एस्टेट सेक्टर सबसे बुरे दौर में प्रवेश कर चुका है. सामान्य स्थिति में देशभर में निर्मित मकानों की संख्या 11 माह की आपूर्ति जितनी होनी चाहिए. पर आज की तारीख में देश में जितने मकान बनकर खाली पड़े हैं, बिक नहीं रहे हैं, वह 42 माह तक की आपूर्ति करने जितने हैं. मतलब साढ़े तीन साल तक देश में एक भी मकान ना बनें, तो भी खरीददारों को मकान मिल जायेंगे.

एजुकेशन सेक्टर भी मंदी की चपेट में है. इंजीनियरिंग कॉलेजों में ताला लगने की नौबत. बड़े और नामी कॉलेजों के छात्रों को जॉब नहीं मिल रहा. छात्रों का कैंपस सलेक्शन नहीं हो रहा. कई इंजीनियर कॉलेज बंद होने या बिकने की स्थिति में हैं.

तो बेहतर स्थिति कहां है. शायद कहीं नहीं. पर कहीं कोई फुसफुसाहट नहीं. कहीं कोई शोर नहीं. मेन स्ट्रीम मीडिया भी चुप है. खासकर हिन्दी मीडिया. सरकार भी निश्चिंत है.

कारण कोई सवाल पूछने वाला नहीं. सरकार को यही लग रहा है कि मंदिर-मस्जिद, हिन्दु-मुस्लिम, राष्ट्रवादी-देशद्रोही, कश्मीर-370 को लेकर माहौल को गरम करते रहो और चुनाव जीतते रहो.

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पूर्व वित्तमंत्री अरूण जेटली ने शायद ठीक ही कहा था: बेरोजगारी नहीं है. होती तो युवा सड़क पर नहीं उतरते. तब सरकार ने आंकड़े छिपाये थे. अब आंकड़े सबके सामने हैं. फिर भी युवा सड़क पर नहीं उतर रहे.

तो क्या अब यह मान लिया जाये कि बेरोजगार हो चुके युवकों ने अब सरकार से उम्मीद ही छोड़ दी है या फिर सरकार ने पिछले कुछ सालों में हालात ही ऐसे बना दिये हैं कि युवकों को लोग रहा है कि सवाल पूछे, तो भ्रष्टाचारी-देशद्रोही करार दिये जायेंगे.

पहले कहा नोटबंदी से देशभर में आतंकवाद-भ्रष्टाचार खत्म होगा. अब कहा जा रहा धारा 370 हटने से जम्मू कश्मीर से भ्रष्टाचार-आतंकवाद खत्म हो जायेगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि ना नोटबंदी से आतंकवाद-भ्रष्टाचार खत्म हुआ और ना ही धारा 370 के हटने से खत्म होगा.

ऐसे में अंग्रेजी दैनिक टेलिग्राफ के दिल्ली संस्करण में 14 अगस्त को ऑटो सेक्टर में मंदी को लेकर छपी खबर की हेडिंग सटीक बैठती है:-

Article-18.71,

See no economy

Hear no economy

Speak no economy

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