
Kolkata : दक्षिण 24 परगना के विस्तृत समुद्र तटीय क्षेत्र सुंदरवन में इको ऑब्जर्वेशन स्थापित करने के लिए केंद्र व राज्य की सरकारें एक साथ आगे आयी हैं. बताया गया है कि राज्य के वन विभाग, भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और डिस्कवरी इंडिया के सहयोग से, सुंदरवन के लिए इको ऑब्जर्वेशन (पारिस्थितिक वेधशाला) की स्थापना की गयी है.
भारत में मैंग्रोव संरक्षण और परिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाये रखने के लिए यह पहली पहल है. वेधशाला में एक प्रयोगशाला शामिल है, जो सुंदरवन में स्थित है और एक गश्ती नाव पर रखा गया मोबाइल डेटा लॉगर है. इससे पानी की लवणता, मैलापन, तापमान और ऑक्सीजन और पीएच स्तर को रिकॉर्ड किया जा रहा है.
एकत्र किये गये नमूनों का विश्लेषण प्रयोगशाला में पानी के जैविक संकेतों का पता लगाने के लिए किया जायेगा, जिसमें माइक्रोप्लांकटन की स्थिति भी शामिल है.
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जल स्तर बढ़ने से क्षति
प्रयोगशाला स्थापित करने का उद्देश्य पूरे पारिस्थितिक तंत्र का अवलोकन प्राप्त करने के लिए पोषक तत्वों की उपलब्धता, लवणता और जैव-संकेतकों के बीच के लिंक को समझना है. जलवायु परिवर्तन के कारण, सुंदरवन का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे द्वीपों और निवासियों को क्षति हो रही है.
एक अस्थायी संरक्षण शिविर, वन संरक्षक के साथ एक जहाज, मैंग्रोव पर नज़र रखने के लिए दक्षिण 24 परगना डिवीजन के लिए एक स्पीड बोट और 10 किमी के साथ जाल का उपयोग करके बाड़ लगाने का काम भी किया गया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि हमलावर बाघ आसपास के क्षेत्रों में नहीं आये जिससे परियोजना सतत चलती रहे.
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