New Delhi: कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच देश की आर्थिक स्थिति बदहाल है. वहीं देश में बेरोजगारी की समस्या भी चरम पर है. सेंटर फोर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (एमआइइ) के आंकड़े बताते हैं कि फिलवक्त में हर 10 में से एक शख्स बेरोजगार है.
लॉकडाउन में छूट मिलने के बाद रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन आंकड़े इससे बिल्कुल अलग है. देश में रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं. और बढ़ती बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन गयी है. एमआइइ के आंकड़ें बताते हैं कि अगस्त महीने में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी लगभग 10 फीसदी रही है. फॉर्मल सेक्टर में अगस्त में देश की बेरोजगारी दर का हाल सबसे बुरा रहा है.
अगस्त में और बढ़ी बेरोजगारी
अगर एमआइइ के आंकड़ों को देखें तो जुलाई के मुकाबले अगस्त में बेरोजगारी की दर और बढ़ी है. और ये तकरीबन 10 फीसद हो गयी है, यानी हर 10 में एक व्यक्ति आज की तारीख में बेरोजगार है. जबकि उम्मीद थी कि अनलॉक होने के कारण रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. बता दें कि जुलाई में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 9.15 फीसद थी, जो अगस्त में बढ़कर 9.83 हो गयी है.
अगस्त महीने के बेरोजगारी के आंकड़े श्रम बाजार में सुस्ती के संकेत देते हैं. मई, जून के मुकाबले जुलाई में स्थिति सुधरी थी, लेकिन अगस्त में फिर से भारी गिरावट देखने को मिली है.
ग्रामीण क्षेत्रों में 7.65 फीसद है बेरोजगारी दर
रोजगार के मामले में गांवों की हालत भी खस्ता है. ग्रामीण इलाके में खरीफ फसल की बुआई के बाद बेरोजगारी बढ़ी है. जुलाई में गांवों में बेरोजगारी की दर 6.66 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 7.65 फीसद हो गयी है. ग्रामीण क्षेत्रों में काम की कमी होने से पलायन भी बढ़ेगा.
इन पांच राज्यों में सबसे अधिक बेरोजगारी की मार
अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत के बीच बढ़ती बेरोजगारी के मामले में देश का हरियाणा राज्य सबसे आगे हैं. हरियाणा में बेरोजगारी दर 33.5 प्रतिशत है. इसके बाद दूसरे नबंर पर त्रिपुरा है, जहां बेरोजगारी दर 27.9 फीसदी है. तीसरे और चौथे नबंर पर क्रमशः राजस्थान और गोवा है, जहां अनइम्प्लायमेंट रेट 17.5 प्रतिशत और 16य2 प्रतिशत है. जबकि 15.8 फीसदी बेरोजगारी दर के साथ हरियाणा पांचवें नबंर पर है.
प्री-कोविड फेज से भी ज्यादा बढ़ी बेरोजगारी
कोरोना संकट के कारण देश की अर्थव्यवस्था का काफी नुकसान हुआ है. लेकिन आंकड़ों को देखें तो देश में अगस्त महीने की बेरोजगारी दर प्री-कोविड फेज से भी अधिक है. देश में कोरोना संकट को देखते हुए मार्च 2020 के आखिर में लॉकडाउन की घोषणा की गयी थी. लेकिन फरवरी के आंकड़ें बताते हैं कि उस महीने में बेरोजगारी दर 8.65 फीसदी, जनवरी में 9.70 फीसदी और दिसबंर में 9.02 फीसदी था, जो अगस्त के आंकड़ों के मुकाबले कम है. इस अवधि में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 7.76% और 7.60 % के बीच थी. लेकिन अगस्त में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 8.35 फीसदी रही, जो जुलाई के 7.43 फीसद से भी कम है. हालांकि, जून में ये 10.99 फीसदी पर पहुंच गयी थी.




