
- आरडीडीई ने आरोपों से किया इनकार
Ranchi/Hazaribagh: भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर हजारीबाग किसी न किसी बहाने से सुखियों में रहता है. इसबार मामला शिक्षा विभाग से जुड़ा है. आरडीडीई शिवनारायण साह एक खुद ही चर्चे में आ गये हैं.
श्री शिवनारायण, पहली बार बोकारो के डीएसई सह झाशिप के डीपीसी पद पर रहते हुए तब चर्चा में आये थे, जब एक शिक्षक को कथित अभियंता बनाकर उसे लाभ दिया गया था. इस शिक्षक से असैनिक कार्य कराने के आरोप में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था.
लेकिन इस बार हजारीबाग आरडीडीई कार्यालय में रात पाली की ड्यूटी लगाने को लेकर कई वे सवालों से घिर गये हैं. सूचना है कि पिछले 13 मई की देर रात करीब 10 बजे तक वह दफ्तर में अपने लिपिक परमानंद और अन्य कर्मियों के साथ उपस्थित थे.
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लिपिक परमानंद की संलिप्तता उजागर
इसका कारण डीएलएड कालेजों में इंटरनल प्रैक्टिकल में दिये गये नंबरों की सूची पर हस्ताक्षर करने से जुड़ा बताया जा रहा है. मामले में लिपिक परमानंद की संलिप्तता भी बतायी जा रही है.
लिपिक पर डीएलएड कालेजों से आरडीडीई के हस्ताक्षर के एवज में मोटी रकम के डिमांड का आरोप लगाया गया है. आरडीडीई के साथ आरोपी लिपिक का 13 मई की देर रात करीब 10 बजे तक साथ रहना आखिर क्या बयान करता है. इस प्रकरण से अवैध वसूली का ही संदेह होता है.
पूछे जाने पर आरडीडीई कहते हैं, लिपिक को निगरानी से पकड़वा दीजिए. मैंने डीएलएड कालेजों में बतौर एक्सटर्नल गया था. नाश्ता-भोजन आदि किया. वहां कुछ देर तक रुका रह गया. पड़ताल की तो पाया कि कालेजों में प्रशिक्षुओं को इंटरनल प्रैक्टिकल में मनमाना नंबर दे दिया गया है.
इस बात को लेकर उनकी आपत्ति है. जो लिपिक रकम मांग रहा है, वह ठगने का काम कर रहा है.
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हस्ताक्षर करने के बदले पैसे लेने का आरोप
पहले तो उन्होंने उस लिपिक पर कार्रवाई के बारे में कुछ नहीं कहा. लेकिन फिर यह पूछे जाने पर कि आफिस के अधिकारी के हस्ताक्षर के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगाया जा रहा है और आपकी चुप्पी को इसमें संदिग्ध नजरिये से देखा जा रहा है, तो उन्होंने जांच के बाद आरोपी लिपिक पर कार्रवाई करने की बात कही.
गौरतलब है कि 14 मई को दिन के एक बजे जब लिपिक का पक्ष लेने का प्रयास किया गया, तो हाजिरी बनाकर वह आरडीडीई आफिस से बिना सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित पाया गया. वहां मौजूद कोई भी कर्मचारी नहीं बता पाया कि वह कहां गायब हो गया है. आरडीडीई ने कहा कि वह जब कालेजों में उतनी देर रुके रहे तो, प्राचार्य या सचिव ने हस्ताक्षर नहीं करने का गंभीर मामला क्यों नहीं उठाया.
इस पर एक कालेज के सचिव ने बताया कि सात मई को प्रैक्टिकल हुआ, तो 8 मई को क्यों नहीं नंबर सूची पर हस्ताक्षर कर काम आगे बढ़ाया गया. वहीं दूसरी ओर, 12 मई की जगह 13 मई यानी एक दिन विलंब से सूची भेजने की बात आरडीडीई खुद स्वीकारते हैं.
प्रशिक्षुओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है
हालांकि यह मामला अब भी उतना सीधा नहीं दिखायी देता है. इससे प्रशिक्षुओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है. इधर सरकारी बीएड कालेज का रिजल्ट विलंब होने की वजह भी आरडीडीई को ही बताया जा रहा है.
यहां पर भी, प्रैक्टिकल में नंबर और सूची पर हस्ताक्षर के गोरखधंधे की बात सामने आ रही है. जबकि वह खुद बीएड कालेज के प्रभारी प्राचार्य भी हैं. हालांकि आरडीडीई इस मामले में भी खुद को निर्दोष बताते हैं कि उनके स्तर से कुछ देरी नहीं हुई है.
कब क्या हुआ
गौरतलब है कि प्राइवेट बीएड कालेजों के रिजल्ट के काफी दिनों बाद सरकारी बीएड कालेज का रिजल्ट निकला था. आरडीडीई कहते हैं, मैंने तो नंबर देकर सूची पर हस्ताक्षर कर दिये थे.
इधर स्थापना प्राप्त अनुदानित हजारीबाग जिले के 12 हाई स्कूल और 9 इंटर कालेजों के लिए आयी 2.54 करोड़ की राशि बिल पर आरडीडीई के हस्ताक्षर नहीं होने से इसके लैप्स हो जाने का मामला भी सामने आया है. इस संबंध में बताया जाता है कि 27 मार्च को हजारीबाग डीइओ आफिस में आवंटन उपलब्ध हुआ. 28 मार्च को बिल कोडरमा भेजा गया.
दरअसल शिवनारायण साह उस जिले में डीइओ और उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आरडीडीई के अतिरिक्त प्रभार में हैं. हजारीबाग आने की वजह उनकी अपनी जरूरत बतायी जाती है. इस समय भी वह कोडरमा में ही थे. स्थापना अनुमति प्राप्त स्कूल-कालेज प्रशासन के कर्मियों को कोडरमा बुलाने तब बिल पर हस्ताक्षर करने की बात बार-बार कही जा रही है.
देर रात तक ऑफिस में काम करने का क्या है अर्थ
इसी आस में 28 मार्च को भेजे गए बिल को 30 मार्च की देर रात 11 बजे साइन कर आनलाइन किया गया. विलंब होने के कारण 31 मार्च की रात तक बिल पारित नहीं हो सका. इसपर आरडीडीई ने सफायी दी कि चार दिन से लिंक नहीं होने से उनके आफिस के बिल का भी पेमेंट नहीं हो पाया था. आवेदन के जरिये डिमांड करने पर राशि वापस की जायेगी.
दूसरी ओर आरटीआई की सुनवाई में भी आरडीडीई पर कई आरोप लगाये गये हैं. शिक्षा विभाग में यह अपीलीय पदाधिकारी माने जाते हैं. पहले से कहा जाता रहा है कि ये हजारीबाग अपनी जरूरत के अनुसार आते हैं.
इस हालत में आरटीआई की सुनवाई यहां के बाबू के किये जाने की शिकायत है. इस पर भी, बाद में आरडीडीई उसपर बैकडेट में हस्ताक्षर कर देते हैं.
क्या कहते हैं आरडीडीई
आरोप को नकारते हुए आरडीडीई कहते हैं कि लिपिक सिर्फ प्रक्रिया से संबंधित कार्य को करते हुए तारीख निर्धारित कर सूचना देने का काम करते हैं. मामले की सुनवाई वह खुद आकर करते हैं. फिर भी मामला जो भी हो, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में शिक्षा विभाग के सबसे बड़े पदाधिकारी पर इस तरह के आरोप लगना गंभीर बात है.
मामले में उच्चाधिकारी से इन तमाम बिंदुओं पर निष्पक्ष और ईमानदारी से जांच करने की मांग झाविमो के वरिष्ठ नेता स हशिक्षाप्रेमी बटेश्वर प्रसाद मेहता ने उठाया है. वे कहते हैं- उन्होंने इन तमाम बिंदुओं पर कमिश्नर, शिक्षा सचिव, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर निगरानी विभाग, केंद्रीय मानव संसाधन विकास विभाग, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को शिकायत पत्र भेजने का मन बनाया है. जल्दी ही वे पत्र लिखेंगे.
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