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राज्य के डीएसइ कार्यालयों ने की कोताही, सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की पेंच में 10 माह से फंसा है शिक्षकों का वेतन

Ranchi : राज्य के 24 जिलों के डीएसइ कार्यालय की कोताही का खामियाजा शिक्षक भुगत रहे हैं. ये शिक्षक राज्य के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाते हैं. इनकी नियुक्ति जुलाई 2019 में हाइकोर्ट से आदेश से हुई थी. नियुक्ति के बाद इन शिक्षकों के सर्टिफिकेट का वेरिफिकेशन होना था. लेकिन सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया अब तक चल ही रही है. यही वजह है कि ये शिक्षक नियुक्ति के 10 माह बीत जाने के बाद भी वेतन को तरस रहे हैं.

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डीएसई कार्यालय में कई महीनों से पड़ी है राशि

नियम के मुताबिक, विभाग द्वारा इन शिक्षकों के सभी शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच संबंधित बोर्ड या विश्वविद्यलय से हो जाने के बाद ही वेतन मुक्त करना है. जानकारी के मुताबिक, नवनियुक्त शिक्षकों के द्वारा जांच से संबंधित प्रमाण पत्र एवं राशि महीनों पहले जिला में डीएसइ कार्यालय को उपलब्ध करा दी गयी थी. कई जिला के डीएसइ कार्यालय में प्रमाणपत्रों के लिए जमा की गयी राशि का ड्राफ्ट लैप्स कर चुका है.

शिक्षकों की ओर से लैप्स ड्राफ्ट को फिर से बनाकर जमा किया गया है. हाइकोर्ट के आदेश पर लगभग 4000 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. इनमें से लगभग आधे शिक्षकों का वेतन सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन की पेंच में फंसा हुआ है.
इधर लॉकडाउन हो जाने के बाद से वेरिफिकेशन का काम भी रूक गया है. लॉकडाउन में पैसे नहीं मिलने से शिक्षकों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गयी है. वहीं पूरे परिवार सहित घर के अंदर मायूसी की जिंदगी गुजारने लिए शिक्षक मजबूर हैं.

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10 माह से नहीं हुआ है वेतन भुगतान

इस संबंध में अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र चौबे, महासचिव राममूर्ति ठाकुर व मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने बताया कि राज्य के प्राथमिक व मध्य विद्यालय में जुलाई 2019 में हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य के विभिन्न जिलों में प्राथमिक शिक्षकों की नियुक्ति की गयी थी.

लेकिन इन शिक्षकों में से लगभग 50 प्रतिशत शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है. संघ शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए विभाग से अनुरोध करता है कि लॉकडाउन की विषम परिस्थिति में इन शिक्षकों को कम से कम लॉकडाउन की अवधि का वेतन मुक्त कर दिया जाये.

प्रमाण पत्र जांच कार्य में हो रही देरी के लिए शिक्षकों की तरफ से कोई कमी नहीं है. बल्कि सभी डीएसइ कार्यालय की कोताही की वजह से दस माह बीतने के बावजूद शिक्षकों का वेतन भुगतान नहीं हो पाया है.

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