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बहुत जल्द कोरोना का Peak Time आयेगा, दिसंबर तक गिरेगा ग्राफ: डॉ बीएल शेरवाल

Ranchi: रिम्स के पूर्व निदेशक और राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के निदेशक बीएल शेरवाल आज रिम्स में थे. डॉ बीएल शेरवाल माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट भी हैं और दिल्ली में कोरोना से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना के केस में उछाल बहुत ही जल्द आयेगा.

दिसंबर तक कोरोना का ग्राफ नीचे की ओर चला जाएगा. उन्होंने कहा कि कोरोना से बचने के लिए में तीन टी के फॉर्मूला पर काम किया जाना चाहिए. टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट. मतलब अधिक से अधिक संख्या में टेस्ट किया जाएगा. मरीजों के कांटेक्ट को ट्रेस किया जाये और उन्हें ट्रीट किया जाये.

अधिक से अधिक मरीजों के जांच करना जरुरी है. कोरोना अपने पीक पर जाने के बाद ही नीचे आयेगा. मतलब अधिक से अधिक लोगों की जांच कर उन्हें चिन्हित किया जाएगा. और उनकी इलाज की जायेगी.

पर झारखंड में प्रति दिन जांच की दर लगभग 3 हजार के करीब है. वहीं पड़ोसी राज्य बिहार में प्रतिदिन जांच का आंकड़ा 18 हजार के करीब है.

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गंभीर बीमारी के मरीज और बुजुर्गों पर अधिक ध्यान की जरुरत

डॉ बीएल शेरवाल ने कहा कि कोरोना से निपटने के लिए कई तरह के उपाय किये जा रहे हैं. इसे खत्म करने के लिए किसी तरह की प्रॉपर दवा नहीं आ पायी है. इसलिए  गंभीर बीमारी के मरीज और बुजुर्गों पर अधिक ध्यान देने की जरुरत है.

उन्होंने कहा कि प्रतिदिन नये-नये लक्षण सामने आ रहे हैं. टेस्ट में फर्क आ रहा है. ऑक्सीजन सेचुरेशन में फर्क आ रहा है. उन्होंने कहा कि घर में सेचुरेशन जांच करने के लिए मशीन रखा जाना चाहिए. 90 से कम सेचुरेशन होने पर डॉक्टर से परामर्श लेकर जांच करा लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि सर्दी, खांसी, बुखार जैसी स्थिति में अगर संशय लगे तो जांच करा लेना चाहिए.

ट्रूनेट मशीन भी जांच के लिए कारगार

डॉ बीएल शेरवाल ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों में लगे ट्रूनेट मशीन भी कोरोना की जांच में कारगर साबित हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि पहले सिर्फ आरटीपीसीआर पर ही जांच की निर्भरता थी. पर आरटीपीसीआर भी कारगर साबित हुआ है. फर्क सिर्फ इतना है कि आरटीपीसीआर मशीन में अधिक सैंपल की जांच होती है. वहीं ट्रूनेट में सिर्फ दस की जांच हो पाती है.

वहीं माइक्रोबायोलॉजी के एचओडी डॉ मनोज ने स्पष्ट किया कि ट्रूनेट में पहले स्क्रीनिंग होती है. अगर नेगेटिव हुआ तो शत प्रतिशत नेगेटिव हो जाता है. संशय की स्थिति में कंफर्मेशन किट से जांच हो रही है. ट्रूनेट की शुरुआत में सिर्फ स्क्रीनिंग किट ही मौजूद थे. अब कंफर्मेशन किट आ गयी है.

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