
Ranchi: डॉ खगेंद्र ठाकुर के निधन से सांस्कृतिक और वैचारिक आंदोलन में खालीपन आया है जिस पर लोगों को विचार करना चाहिए. आम जन, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों को एक मंच पर लाने का काम इन्होंने किया.
उक्त बातें प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य महासचिव डॉ मिथिलेश कुमार ने कही. वे गुरुवार को डॉ खगेंद्र ठाकुर की स्मृति सभा को संबोधित कर रहे थे.
इस दौरान उन्होंने कहा कि लेखक विचारक वर्ग के लिये डॉ ठाकुर का निधन विचारनीय है. यह एक अपूरणीय क्षति है. वहीं सीपीआइ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य केडी सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे लेखक और विचारक की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य ने महान साहित्यकार, भारतीय संस्कृति के दिग्दर्शक को खो दिया. उनके पास कई राजनैतिक व सांस्कृतिक आख्यान का विपुल भंडार था. उन्होंने कहा कि पार्टी के कई महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी अहम भूमिका रही है.
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आर्थिक-वैचारिक मोर्चे पर मिलता रहा सहयोग
राज्य सचिव भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि जन संस्कृति के लिए ठाकुर का जाना गहरी क्षति है. आम जनता और बुद्धिजीवियों के बीच की गहराई को कम करने में उनकी सक्रिया भूमिका रही.
उनकी प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे आर्थिक, राजनैतिक वैचारिक मोर्चों पर बराबर सहयोग करते थे. कई आंदोलनों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभायी.
न सिर्फ भूमिका निभायी बल्कि लोगों को एकजुट करने में भी इनकी भूमिका अहम रही. वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए मेहता ने कहा कि संविधान में लोगों को विश्वास करना चाहिए.
मौके पर राजेन्द्र यादव, महेन्द्र पाठक, अजय कुमार सिंह, शशि कुमार, इफ्तेखार महमूद, मंगल सिंह ओहदार, सुरेश यादव, पावेल कुमार समेत अन्य लोग उपस्थित रहे.
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