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पथ निर्माण विभाग में इंजीनियरों के प्रमोशन में गड़बड़ी पर HC ने सचिव को कहा –  8 हफ्ते में दें प्रमोशन या जवाब 

Ranchi: आठ अगस्त 2019 को न्यूज विंग ने “पथ निर्माण विभाग में इंजीनियरों के प्रमोशन में गड़बड़ी, हैंडपिक कर जूनियर को बनाया सीनियर” शीर्षक से एक खबर चलायी थी. दरअसल विभाग में अधिकारियों पर प्रमोशन में गड़बड़ी और अनियमितता के आरोप लगे. आरोप यह है कि अधिकारियों ने प्रमोशन देने में वरीयता को प्राथमिकता न देते हुए अपने मनचाहे इंजीनियर्स को हैंडपिक किया है.

इससे करीब 100 से ज्यादा इंजीनियर्स प्रभावित हैं. जिनके साथ ऐसा हुआ है. सचिव समेत चीफ इंजीनियर को आवेदन देकर इस गलती को सुधारने की मांग इंजीनियरों ने की थी. लेकिन विभाग की तरफ से इस मामले में किसी तरह की कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई. न्यूज विंग ने खबर में पथ निर्माण विभाग के सचिव केके सोन का बयान भी दर्ज किया था.

उन्होंने कहा था कि इस बारे में विभाग के चीफ इंजीनियर से बात की है. चीफ इंजीनियर ने माना है कि प्रमोशन देने में कुछ गड़बड़ियां हुईं हैं. मैंने उनसे सभी गड़बड़ियों को दुरुस्त करने को कहा है. इस महीने में ही इसे सुधार लिया जाएगा. लेकिन अक्टूबर खत्म होने को है और कुछ नहीं हुआ.

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अब हाईकोर्ट ने मांगी सचिव से जवाब

प्रमोशन में हुई गड़बड़ी में कुछ नहीं होता देख इंजीनियर्स ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 16 अक्टूबर को रिट पिटीशन दायर हुई. 24 अक्टूबर को कोर्ट ने एक आदेश जारी किया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि तीन हफ्ते के अंदर याचिकाकर्ता रिट पिटीशन और आदेश की कॉपी को लेकर विभाग के सचिव के पास जाएं.

कोर्ट ने अपने आदेश में आगे लिखा कि विभाग के सचिव इस केस को कंसीडर करते हुए एक आदेश जारी करें. प्रमोशन दे देने या नहीं देने की जायज और ठोस वजह कोर्ट में आठ हफ्ते के अंदर दें.

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पहली गड़बड़ी

2018 के 12 जून को विभाग की तरफ से एक चिट्ठी जारी हुई. चिट्ठी के मुताबिक विभाग का कहना था कि पथ निर्णाण विभाग के जितने भी इंजीनियर दूसरे विभागों में पदस्थापित हैं, उन्हें वो ही विभाग प्रमोशन दे सकता है.

जबकि नियमों की बात करें तो, पथ निर्माण विभाग के पैरेंट विभाग होने की वजह से प्रमोशन कभी भी पथ निर्माण विभाग ही कर सकता है. इस आदेश के आलोक में कई विभागों ने इंजीनियरों का प्रमोशन किया, तो कुछ विभागों ने प्रमोशन देने से मना कर दिया. ऐसे में कई जूनियर इंजीनियरों को प्रमोशन मिला और जो कि वरीयता ग्रेडेशन का एक तरह उल्लंघन है.

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दूसरी गड़बड़ी

दूसरी बार, एक मार्च 2019 को जब विभाग ने दोबारा प्रमोशन दिया तो, इसमें काफी गड़बड़ियां देखने को मिली हैं. प्रमोशन देने की प्रक्रिया में काफी अनियमितता बरती गयी है. प्रमोशन लिस्ट देखने के बाद लगता है कि विभाग की तरफ से इंजीनियर को हैंडपिक किया गया है. जेनरल केटेगरी में जेई से एई का प्रभाऱ मिलनेवाली लिस्ट में वरीयता क्रमांक 355 से शुरू होना चाहिए था. लेकिन शुरुआत 359 से हुई. क्रमांक 510 तक को प्रमोशन दिया गया.

लेकिन बीच-बीच में वरीयता के हिसाब के कई नाम नदारद हैं. ऐसे करीब 80 जूनियर इंजीनियर्स हैं. जिन्हें सीनियर होने के बावजूद प्रमोट नहीं किया गया. कुछ नाम लिस्ट में ऐसे हैं, जिनपर विभाग की खूब कृपा बरसी है. उनमें से कुण्डल कुमार हैं, जिन्हें भवन निर्माण विभाग से वापस पथ निर्माण विभाग में बुला कर एई (सहायक अभियंता) से ईई (कार्यपालक अभियंता) का प्रभार दिया गया.

वहीं राजीव रंजन मुंडा को आरईओ, सत्येंद्र प्रसाद सिंह को भवन विभाग, विनय कुमार अग्रवाल को आरईओ ओर मो. ईसराइल अंसारी को आरईओ से बुलाकर एई से ईई में प्रमोट किया गया.

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जूनियर के नीचे करना पड़ रहा है सीनियर को काम

वरीयता को दरकिनार कर प्रमोशन देने की वजह से एक बड़ी समस्या खड़ी हो गयी है. विभाग के सीनियर इंजीनियरों को अब जूनियर के नीचे काम करना पड़ रहा है. पथ निर्माण विभाग में पदस्थापित कुछ लोगों को प्रमोशन देकर दूसरे विभाग में भेजा गया है.

ऐसा करने से विभाग में पहले से मौजूद जेई को अपने ही जूनियर एई के नीचे काम करना पड़ रहा है. बाकायदा उन्हें जूनियर के आदेश का पालन करना पड़ रहा है. इनमें सुनील कुमार सिंह, बलराम पांडे, महेश सिंह, शमशीर इकबाल और दिलीप कुमार शामिल हैं.

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