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स्वामी अग्निवेश पर हमले का एक भी आरोपी नहीं पकड़ाया, एसआइटी ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की  

Ranchi :  राज्य में स्वामी अग्निवेश पर हुए हमले के बाद एक भी आरोपी को सरकार पकड़ नहीं पायी है. जिस तरह से स्वामी अग्निवेश पर हमला किया गया.  एक तरह से माब लिंचिंग था. . लेकिन एक साल हो जाने के बाद भी सरकार और प्रशासन की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं करना सरकार की मंशा को दिखाती है. उक्त बातें स्वामी अग्निवेश के सचिव मनोहर मानव ने प्रेस वार्ता के दौरान कही. वे बुधवार को प्रेस को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि स्वामी अग्निवेश पर हुए हमले की जांच के लिए एसआइटी का  गठन किया गया. लेकिन एसआइटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की. जबकि घटना हुए एक साल हो चुका है. बता दें कि पिछले वर्ष 16 जुलाई को स्वामी अग्निवेश पाकुड़ में आदिवासी मुद्दों पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. उस दौरान उन पर उपद्रवियों ने हमला किया था.

सरकार आवाज दबा रही, हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी है

मनोहर ने कहा कि ऐसी घटनाओं पर सरकार की चुप्पी दिखाती है कि सरकार लोगों की आवाज को दबाना चाहती है. पिछले कुछ सालों से राज्य में लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले लोगों पर सरकार कार्रवाई कर रही है. जो सरकार की मंशा सिद्ध करती है. यह तो स्पष्ट है कि राज्य में लोकतंत्र खतरें में है. कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण अब हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी है. हाईकोर्ट इस मामले में निष्पक्ष निर्णय लेगा.

स्वामी अग्निवेश के बारे में बताते हुए इन्होंने कहा कि स्वामी अग्निवेश हमले के बाद से लीवर की बीमारी से जुझ रहे है. घटना के बाद लंबे समय में स्वामी का इलाज एम्स में कराया गया. इलाज के कारण अधिकांश समय दिल्ली में ही रहते है.  उन्होंने कहा कि वर्तमान में ये कोयम्बटूर में है, जहां उनका इलाज चल रहा है. मनोहर ने बताया कि इस घटना के बाद से स्वामी अग्निवेश को परेशानी बढ़ी है.

आरएसएस के विधान से चल रहा है देश : प्रेमचंद मुर्मू

इस संबध में आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के अध्यक्ष प्रेमचंद मुर्मू ने कहा कि देश खतरे में है. राज्य भी इससे अछूता नहीं है. संविधान का कहीं कोई महत्व नहीं रह गया है. संविधान प्रदत्त प्रावधानों को धज्जियां उड़ायी जा रही है. अब देश आरएसएस के विधान से चल रहा है. इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में पेसा कानून को सरकार अब तक लागू नहीं कर पायी है. जबकि अलग अलग राज्य सरकारों को इस संबध में अवगत कराया गया है. इससे प्रतीत होता है कि लोग चाहते ही नहीं कि राज्य में पेसा कानून लागू हो. क्योंकि इससे सभी अधिकार ग्राम सभा को चले जायेंग. मौके पर पंकज श्रीवास्तव, क्लेमेन टोप्पो समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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