
Dhanbad: सरकारी सिस्टम से लड़ते-लड़ते आखिरकार चिरकुंडा की नंदी मुंडाईन हार गई. विधवा पेंशन के इंतजार में उनकी जान चली गई. पांच सालों तक विधवा पेंशन के लिए निरसा से लेकर एग्यारकुंड प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाते लगाते वो थक गई थी. गरीबी व बीमारी से ग्रसित महिला ने सोमवार को दम तोड़ दिया.
नंदी मुंडाईन का अपना कोई नहीं था. वह टूटी-फूटी झोपडी में मांग छांद कर अपना गुजारा करती थी.
शरीर कमजोर होने से बीमारी से ग्रसित हो गई थी और अंत में सोमवार को उसने दम तोड़ दिया. मोहल्ले वासियों ने अपने में चंदा इकट्ठा कर बराकर नदी घाट में नंदी का दाह संस्कार किया.
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स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि प्रो अरूण कुमार ने कहा कि घटना दुखद है और चिरकुंडा निकाय क्षेत्र में एकमात्र आदिवासी बस्ती है. जिसमें 100 आदिवासी परिवार रहते हैं. इनके पास कोई सरकारी सुविधा नहीं है. सरकार को इनके विषय में संज्ञान लेना करना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि इसी साल अगस्त महीने में स्थानीय पार्षद भारती कुमारी की पहल पर निरसा के बीडीओ व चिरकुंडा परिषद के तत्कालीन प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी विकास कुमार राय और एग्यारकुंड की सीओ अमृता कुमारी ने कैंप लगाकर नंदी मुंडाईन व आदिवासी टोला के अन्य लाभुकों का विधवा व वृद्धा पेंशन और प्रधानमंत्री आवास का आवेदन भरवाया था. लेकिन वो भी नहीं हो सका.
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