
Akshay Kumar Jha
Ranchi: हमेशा चर्चा में बने रहने वाले गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे फिर से एक बार चर्चा में हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है. पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि “बाल सुलभ हरकतों के लिए यानि मेरे ऊपर झूठा 5 केस करने के लिए चुनाव आयोग से देवघर के उपायुक्त महोदय ने बिना शर्त माफी मांग कर अपनी गलती स्वीकार कर ली है”. इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक स्क्रीन शॉट भी लगाया है, जो कि देवघर डीसी की तरफ से चुनाव आयोग को दिए गये 15 पन्नों के जवाब की आखिरी चार पंक्तियां हैं.
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देवघर डीसी ने इस मुद्दे पर जो जवाब दिया है, उसके कई बिंदु गौर करने लायक हैं. सांसद निशिकांत की तरफ से लिखे गए पोस्ट पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि डीसी ने बिना शर्त चुनाव आयोग से माफी मांगी है, जबकि देवघर डीसी ने जो जवाब दिया है, उसमें सांसद निशिकांत पर गंभीर आरोपों का हवाला दिया गया है. डीसी ने पंद्रह पन्नों की चिट्ठी की आखिरी पंक्तियों में जो लिखा है, उससे इतर उन्होंने चुनाव आयोग के समक्ष पूरे मामले में कई बातें लिखी हैं.
बाल सुलभ हरकतों के लिए यानि मेरे उपर झूठा ५ केस करने के लिए चुनाव आयोग से देवघर के उपायुक्त महोदय ने बिना शर्त माफ़ी माँग कर अपनी गलती स्वीकार कर ली है । pic.twitter.com/C6cG5n7Oi0
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) November 12, 2021
छह मामलों का दिया हवाला, कहा देर से FIR गलत नहीं
देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने गोड्डा सांसद पर देवघर के पांच थानों में एफआईआर दर्ज करायी है. इसपर बीजेपी की तरफ से चुनाव आयोग से शिकायत की गयी. शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने देवघर डीसी को अपना जवाब रखने को कहा. डीसी से सांसद पर एफआईआर करने की वजह पूछी गयी. जवाब में छह मामलों का हवाला देते मंजूनाथ भजंत्री ने कहा है कि देर से एफआईआर कराना कहीं से भी गैरकानूनी नहीं है. छह मामलों में से पांच मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला डीसी ने दिया है.
सारा मामला मधुपुर उपचुनाव को लेकर था. लेकिन देवघर डीसी ने मधुपुर विधानसभा के बाहर भी सांसद पर अफआईआर दर्ज करायी है. चुनाव आयोग ने इस बाबत डीसी ने पूछा है कि विधानसभा से बाहर क्यों सांसद पर एफआईआर हुई? इसके जवाब में डीसी ने आचार संहिता के नियमों का हवाला दिया है. उन्होंने कहा है कि उपचुनाव भले ही एक ही विधानसभा में हुआ हो, लेकिन आचार संहिता पूरे जिले में लागू होती है कि ना कि सिर्फ विधानसभा क्षेत्र में.
कोरोना और अधिकारियों की लेटलतीफी की वजह से हुई देरी
अपने जवाब में देवघर डीसी ने लिखा है कि चुनाव के दौरान उनकी जगह नैंसी सहाय को देवघर का डीसी बनाया गया. दो मई को मतगणना हुई. उसके बाद चार मई फिर से उन्हें देवघर डीसी का पद मिला. उन्होंने मामले को लेकर तमाम अधिकारियों को रिपोर्ट जमा करने को कहा. इसके साथ ही कोविड का दूसरा फेज आ गया. देश के हर जिले की तरह देवघर भी कोविड की चपेट में था. स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रशासन का फोकस था. साथ ही अधिकारियों ने रिपोर्ट देने में देरी की. कोविड के थमने के बाद डीसी की तरफ से दोबारा समय सीमा में जवाब देने के लिए अधिकारियों को लिखा गया, जिसके बाद सांसद पर एफआईआर की गयी.
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