
Ranchi : झारखंड में मानवाधिकार आंदोलन के एक शीर्ष पुरुष त्रिदिब घोष का मंगलवार की शाम पांच बजे रांची के बरियातू स्थित मां रामप्यारी हॉस्पिटल में निधन हो गया. वह 82 साल के थे. वह कोविड-19 संक्रमित थे. वह डोरंडा ओवरब्रिज के पास निवारणपुर में तपोवन मंदिर के पास स्थित अपार्टमेंट में रहते थे. वह अपने पीछे अपनी पत्नी प्रो मालांच घोष और एक बेटा छोड़ गये हैं. उनकी एक्टिविस्ट पत्नी भी महिला अधिकारों और महिला सशक्तीकरण के लिए हमेशा आवाज उठाती रही हैं.
गौरतलब है कि अपने दोस्तों और चाहनेवालों के बीच त्रिदिब दा के नाम से जाने जानेवाले त्रिदिब घोष रांची में पांच दशक से भी ज्यादा समय तक वामपंथी राजनीति में सक्रिय रहे थे. इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके त्रिदिब दा ने जनसरोकार की राजनीति करना बेहतर समझा. वह हमेशा मानवाधिकार और जनमुद्दों के लिए लड़ते रहे. हजारीबाग क्षेत्र से वह आईपीएफ के उम्मीदवार के रूप में तीन बार चुनाव भी लड़ चुके थे. वह हमेशा गरीब और निरीह जनता के हक की लड़ाई लड़ने में विश्वास करते थे और लड़ते थे. वह संयुक्त बिहार में आईपीएफ के नेतृत्वकर्ता भी थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज को बदलने में खपा दिया. उनके निधन पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने शोक जताया है.
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